फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Baghpat News: कैसे मिले बेहतर उपचार, जब मंदिरों में चल रहे आयुर्वेदिक अस्पताल

विज्ञापन
विज्ञापन
बागपत। लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने का दावा किया जाता है लेकिन खेकड़ा और नवादा गांव में मंदिर के एक कमरे में लोगों को आयुर्वेदिक दवा दी जा रही है तो सांकरौद, अमीनगर सराय में करोड़ों रुपये खर्च करके बनाए गए आयुर्वेदिक अस्पताल के भवन पर स्टाफ के अभाव में ताले लटके हैं।
विज्ञापन

खेकड़ा कस्बे और नवादा गांव में आयुर्वेदिक अस्पताल के लिए भवन ही नहीं है। दोनों जगह अस्पताल का संचालन मंदिर के कमरों में किया जा रहा है। भवन और चिकित्सकों की कमी के कारण लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। वहां न पूरी दवाई है और न स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए व्यवस्थाएं है। ऐसे में केवल खानापूर्ति हो रही है।
भवन दो साल से तैयार, स्टॉफ की कमी के कारण नहीं खुले ताले
सांकरौद गांव में 50 बेड और कस्बा अमीनगर सराय में चार बेड के आयुर्वेदिक अस्पताल के भवन तैयार हैं लेकिन स्टॉफ की कमी के कारण दोनों ही भवन में ताले लटके हुए हैं। विभाग की ओर से कई बार स्टॉफ की डिमांड भेजी जा चुकी है, मगर स्टाफ न मिलने के कारण अस्पताल शुरू नहीं हुए हैं।
विज्ञापन


मलकपुर और खेकड़ा के अस्पताल पद विहीन
मलकपुर और खेकड़ा के अस्पताल पदविहीन हैं। 26 साल से दोनों अस्पताल में पद सृजित नहीं हुए हैं, जिससे आयुर्वेदिक चिकित्सकों की नियुक्ति नहीं हो पाई है। दोनों अस्पतालों में विभाग की ओर से सप्ताह में दो दिन चिकित्सक नियुक्त किए गए है, बाकी चार दिन फार्मासिस्ट पर लोगों के इलाज की जिम्मेदारी संभालते है।
ये है अस्पतालों की स्थिति
सांकरौद में 50 बेड के आयुर्वेदिक अस्पताल के अलावा जिला मुख्यालय, खेकड़ा, मलकपुर, पूरनपुर, अमीनगर सराय, ख्वाजा नंगला, बड़ौत, बिनौली में आयुर्वेदिक अस्पताल है। अस्पताल में एक-एक और जिला स्तर पर चिकित्सक के दो पद हैं। एक अस्पताल में एक फार्मासिस्ट का पद हैं। जिले में चार चिकित्सक और फार्मासिस्ट के चार पद रिक्त हैं। चिकित्सकों की कमी के कारण एक चिकित्सक तीन दिन एक अस्पताल और तीन दिन दूसरे अस्पताल में मरीजों की जांच करता है। दो अस्पताल में केवल फार्मासिस्ट पर ही इलाज करने की जिम्मेदारी है। मुख्यालय पर एक ही चिकित्सक होने के कारण आयुर्वेदिक एवं क्षेत्रीय अधिकारी मरीजों की जांच करती है।
ये बोले ग्रामीण
-गांव में शिव मंदिर के एक कमरे में आयुर्वेदिक अस्पताल चल रहा है। अस्पताल में चिकित्सक भी नहीं बैठते, जिससे लोगों को बेहतर इलाज की सुविधा नहीं मिल रही है। - महिपाल, पूरनपुर नवादा

-गांव में चल रहे आयुर्वेदिक अस्पताल में न चिकित्सक की व्यवस्था और न ही पूरी दवाई हैं। लोगों को इलाज कराने के लिए खेकड़ा या बागपत जाना पड़ता है। - श्रीओम शर्मा, पूरनपुर नवादा
वर्जन-

खेकड़ा और मलकपुर के अस्पताल पद विहीन है और जिला मुख्यालय पर भी चिकित्सक नहीं है। सांकरौद और अमीनगर सराय के अस्पताल शुरू करने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। स्टॉफ मिलने पर अस्पताल शुरू कराए जाएंगे। - डॉ. मोनिका गुप्ता, क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें