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कैसे रुके कुपोषण का वार, चार माह से खाद्यान्न का इंतजार

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कैसे रुके कुपोषण का वार, चार माह से खाद्यान्न का इंतजार
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बागपत। जिले में कुपोषण की स्थिति थमने का नाम नहीं ले रही है। विभाग की लापरवाही कुपोषण को और बढ़ावा दे रही है। गर्भवती, धात्री महिलाओं और बच्चों के लिए खाद्यान्न ही नहीं मिल पा रहा है। आंगनबाड़ी केंद्रों पर पहले तो चार महीने देरी से खाद्यान्न मिल रहा था, अब वह भी पहुंचना बंद हो गया है। एक लाख छह हजार बच्चों व महिलाओं को खाद्यान्न का इंतजार है।
जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों पर छह माह से तीन साल तक के 50272 बच्चे पंजीकृत हैं। तीन से छह साल तक के 27499 बच्चे पंजीकृत हैं। गर्भवती व धात्री महिलाएं 27855 पंजीकृत हैं और 1083 अति कुपोषित बच्चे हैं। इनमें भी केवल 80 प्रतिशत के लिए राशन आता है और वह भी कई-कई महीने तक पहुंचता ही नहीं है। आंगनबाड़ी केंद्रों पर मार्च महीने का खाद्यान्न जून के शुरूआत में पहुंचा था और अप्रैल महीने का खाद्यान्न जुलाई में पहुंचना था। लेकिन जुलाई में खाद्यान्न पहुंचा ही नहीं और अगस्त का पहला सप्ताह निकलने के बाद भी खाद्यान्न नहीं आया। ऐसे में सरकार के कुपोषण रोकने के मंसूबों पर विभाग की लापरवाही से ही पलीता लग रहा है।
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इस तरह दिया जाता है खाद्यान्न
महिला एवं बाल विकास विभाग ने खाद्यान्न के लिए पांच वर्ग बनाए हुए है। इनमें एक वर्ग 6 महीने से तीन साल वाले बच्चों के लिए होता है, जिसमें एक किलो दलिया, एक किलो चावल, एक किलो दाल, आधा किलो तेल दिया जाता है। दूसरा वर्ग 3-6 साल के बच्चों के लिए होता है, जिनके लिए आधा किलो दाल, आधा किलो दलिया, आधा किलो चावल मिलता है। तीसरे वर्ग में गर्भवती महिलाएं व चौथे वर्ग में धात्री महिलाएं होती है, जिनको हर महीने एक किलो दाल, डेढ़ किलो दलिया, एक किलो चावल व आधा किलो तेल देना होता है। अति कुपोषित बच्चों के लिए डेढ़ किलो दलिया, डेढ़ किलो चावल, दो किलो दाल, आधा किलो तेल मिलता है।
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- खाद्यान्न कुछ महीने देरी से मिल रहा है जो अभी तक हर महीने मिलता था। लेकिन यहां कुछ समस्या हुई है, जिससे पिछले महीने व अभी तक खाद्यान्न नहीं मिला है। यहां अप्रैल महीने का खाद्यान्न जल्द ही पहुंच जाएगा और उसे आंगनबाड़ी केंद्रों पर भिजवा दिया जाएगा। क्योंकि खाद्यान्न शासन स्तर से आता है, यहां से कोई खरीद नहीं होती है। - विपिन मैत्रेय, जिला कार्यक्रम अधिकारी
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