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अरे ओ सांभा...कितना जुर्माना रखे हैं सरकार गंदगी फैलाने पर

Sat, 30 Dec 2017 12:27 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, खेकड़ा
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साफ सफाई के प्रति लोगों को जागरूक करता शोले फिल्म का गब्बर सिंह। (फोटो शशि धामा) - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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शोले फिल्म का डाकू गब्बर सिंह अब लोगों को स्वच्छता का संदेश दे रहा है। नगर पालिका खेकड़ा ने स्वच्छता के प्रति लोगों का ध्यान आकर्षित करने के लिए शोले के गब्बर सिंह का फोटो चस्पा कर पोस्टर तैयार कराए हैं।
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इन पर डायलॉग के जरिए गंदगी फैलाने पर पांच सौ रुपये जुर्माना रखे होने की बात बताई गई है। स्वच्छ सर्वेक्षण 2018 से पहले पालिका की यह पहल लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गई है।

देशभर में स्वच्छ सर्वेक्षण 2018 के लिए चार जनवरी से सर्वे का कार्य आरंभ होगा। इस बार देश के 4041 शहरों को अभियान में शामिल किया जाएगा। प्रत्येक पालिका को आमजन को स्वच्छता का संदेश देने के अलावा विलोपित स्थल तैयार करने हैं।
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खेकड़ा पालिका की अधिशासी अधिकारी निहारिका चौहान बताती हैं कि सर्वे में करीब 1400 अंक आमजन से पूछे गए सवालों के जवाब के होते हैं। शहर के लोगों को स्वच्छता का संदेश देने और सफाई के प्रति आकर्षित करने के लिए वर्ष 1975 में प्रदर्शित हुई फिल्म शोले के डाकू गब्बर सिंह के मशहूर डायलॉग का सहारा लिया गया है।

फिल्म में गब्बर सिंह बनें अमजद खान कहते हैं कि अरे ओ सांभा...कितना इनाम रखे हैं सरकार हम पर.... लेकिन कसबे में स्वच्छता अभियान के लिए लोगों को जागरूक करने के लिए डायलॉग को अरे ओ सांभा...कितना जुर्माना रखे हैं सरकार गंदगी फैलाने पर’।

जवाब में सांभा कहता है कि पांच सौ रुपये पूरे पांच सौ रुपये। खेकड़ा में चस्पा किए गए यह पोस्टर आकर्षण और चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। अधिशासी अधिकारी बताती हैं कि गब्बर सिंह और डॉयलाग के जरिए लोगों का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया गया है।


जहां रहती थी गंदगी, बनवाई बापू की पेंटिंग
खेकड़ा में जैन इंटर कॉलेज के पास एक जगह ऐसी है जहां लोग गंदगी फैलाते थे। पालिका ने यहां सफाई कराकर सीटें रखवाई, लेकिन लोग नहीं मानें। ईओ निहारिका चौहान बताती हैं कि जिस स्थल पर गंदगी फैलाई जा रही थी, उसे विलोपित स्थल बनवाया जाएगा। इसकी दीवार पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पेंटिंग कराई जा रही है, ताकि लोग यहां गंदगी न फैलाएं।

क्या है स्वच्छ सर्वेक्षण
इस अभियान के तहत देशभर के शहरों को स्वच्छता के आधार पर रैंक प्रदान की जाती है। करीब 14 सौ अंक ऐसे होते हैं, जिनमें सर्वे टीम केवल आम लोगों से पूछताछ के आधार पर ही देती है। 
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