दोघट। भूसा खाते ही सिनौली गांव के किसान सतीश मान के पांच पशुओं की मौत हो गई, जबकि दो की हालत बिगड़ गई। इसके अलावा गांगनौली गांव के किसान जगपाल सिंह के दो पशुओं की मौत हो गई, जबकि तीन पशुओं की हालत बिगड़ गई। वहां आए पशु चिकित्सक ने बीमार पशुओं का उपचार किया। जांच में पता चला कि पशुओं को डाले गए भूसे के ऊपर यूरिया, खाद के बोरे रखने से भूसा जहरीला हो गया। उस भूसे को खाने से मौत होना बताया जा रहा है।
गांगनौली गांव निवासी किसान जगपाल सिंह ने बताया कि सोमवार की सुबह करीब चार बजे अपने घेर में पशुओं को भूसा एवं ज्वार का चारा मिलाकर डाला था। इसके आधा घंटा बाद ही पशुओं की हालत बिगड़ने लगी। पशुओं ने चारा खाना बंद कर दिया और एक घंटे बाद ही एक भैंसे और एक कटिया की मौत हो गई। दो की मौत व तीन पशुओं की हालत बिगड़ने की जानकारी पशु चिकित्सकों को दी। दाहा केंद्र से आए डॉ. जितेंद्र राठी, डॉ. जितेंद्र डबास, मनोज कुमार और शमशाद ने बीमार पशुओं का उपचार किया। उन्होंने जांच की तो भूसे के ऊपर खाद और यूरिया के कट्टे रखे हुए मिले। डॉ. जितेंद्र राठी ने बताया कि यूरिया खाद के पास रखा चारा खाने से पशुओं में नाइट्रोजन गैस के कारण अफारा बन गया था, जिससे दो पशुओं की मौत हो गई। उपचार के बाद तीन पशुओं की हालत में सुधार है।
इसके अलावा सिनौली गांव के किसान सतीश मान के यहां चारा खाते ही तीन भैंस और दो गाय की मौत हो गई, जबकि दो पशुओं की हालत खराब हो गई। वहां गए चिकित्सकों ने जांच की तो उन्होंने दावा किया कि दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए चारे में यूरिया मिलाकर खिलाया जा रहा था। पशुपालक को सलाह दी कि यूरिया मिलाकर खिलाने पर पशु की हालत बिगड़ती है तो तुरंत उसे सिरका पिलाया जाए, जिससे हालत में सुधार हो जाएगा।
वर्जन-
पशुओं की मौत होने का मामला जानकारी में आया है। सिनौली में चारे-भूसे के साथ यूरिया मिलाकर खिलाया गया, जिससे पशुओं की मौत हो गई। पशुओं को यूरिया नहीं खिलाना चाहिए।
-रमेश चंद यादव, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी