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बड़ौत। श्री 1008 पारसनाथ दिगम्बर जैन मंदिर नेहरू रोड में चल रहे श्री सिद्ध चक्र महामंडल विधान के आठवें दिन जैन श्रद्धालुओं ने 1024 अर्घ्य चढ़ाए। सबसे पहले सौधर्म इंद्र संजय जैन ने 1008 शांतिनाथ भगवान को पांडुकशीला पर विराजमान किया। श्रीजी को पाण्डुशीला पर विराजमान करते हुए सभी इंद्र श्रीजी की भक्ति में नृत्य करते चल रहे थे। इसके बाद पंडित सुनील शास्त्री टीकमगढ़ वालों ने पहले मंगलाष्टक का पाठ किया। जल की शुद्धि कराई और चारो कोनो पर चार कलश की स्थापना कराई। सभी इंद्र-इंद्राणियों की प्राशुक जल से शुद्धि कराई और इन्द्रों ने माथे पे तिलक लगाया। फिर प्राशुक जल से सौधर्म इंद्र ने श्री जी का अभिषेक किया। इसके बाद कुबेर इंद्र अतुल जैन, सनत इंद्र विनय जैन, ईशान इंद्र सविन जैन, यज्ञ नायक जयपाल जैन, एसके जैन, उदित जैन, नेमचंद जैन और अन्य सभी इन्द्रों ने भगवान का अभिषेक किया। उसके बाद शांतिनाथ भगवान की शांति धारा की गई। इसके तुरंत बाद दैनिक पूजा शरू की गई। इस अवसर पर पंडित सुनील शास्त्री टीकम गढ़ ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में दान और पुण्य कार्य करने चाहिए, अगर कोई असहाय है तो उसकी मदद करनी चाहिए। इसके बाद सिद्धचक्र महामण्डल विधान शुरू हुआ, जिसमें 1024 अर्घ्य मांडले पर मंत्रोच्चारण के साथ समर्पित किये गए। कार्यक्रम को सफल बनाने में सतेंद्र जैन, नरेश चंद जैन, अनिल जैन, राजीव जैन, अदिश जैन का सहयोग रहा।