चौगामा क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति गंभीर समस्या बन गई है। एनजीटी के आदेश पर प्रशासन ने दूषित पानी दे रहे 413 हैंडपंप उखाड़ तो दिए, लेकिन ग्रामीणों को पेयजल की आपूर्ति कराने के लिए कोई इंतजाम नहीं किया। जल निगम का कहना है कि हैंडपंप और पाइप पेयजल योजना के लिए बजट नहीं मिला है। 200 हैंडपंपों के लिए 197.708 लाख का बजट करीब डेढ़ साल पहले भेजा गया था।
वेस्ट यूपी में प्रदूषित जल से फैलने वाली बीमारियों का मामला एनजीटी में विचाराधीन है। सात सितंबर 2016 को एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल) ने बागपत के 55 गांवों से 413 हैंडपंप उखाड़कर शुद्ध पेयजल की आपूर्ति के आदेश दिए थे। इसके लिए एक कमेटी बनी। 18 जनवरी 2017 तक हैंडपंप उखाड़ लिए गए। लेकिन, उसके बाद पेयजल की आपूर्ति की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई।
पट्टी बंजारान गांव के इंसाद अली कहते हैं कि गांव में जो हैंडपंप लगे थे, उन्हें उखाड़कर प्रशासन के कर्मचारी ले गए, लेकिन पेयजल की व्यवस्था नहीं की गई। सरौरा के प्रधान राजीव कुमार कहते हैं कि क्षेत्र के सभी गांवों में पेयजल की किल्लत बनी हुई है, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस इंतजाम नहीं किए जा रहे।
गर्मी के मौसम में तो लोगों का बुरा हाल हो जाता है। भड़ल के डॉ. विनोद राणा का कहना है कि आमजन की इस सबसे बड़ी समस्या पर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को ध्यान देना चाहिए। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन की लापरवाही की वजह से वे अभी भी दूषित पानी पीने के लिए मजबूर हैं। प्रशासन को शीघ्र ही पानी की आपूर्ति करनी चाहिए।
इस संबंध में जल निगम के अधिशासी अभियंता संजय कुमार गौतम कहते हैं कि 200 हैंडपंप लगाने के लिए करीब 197 लाख रुपये का बजट भेजा गया था, जिसे अभी तक स्वीकृति नहीं मिली है।
जनप्रतिनिधि नहीं दे रहे ध्यान : राठी
बागपत। सामाजिक कार्यकर्ता शिव कुमार राठी का कहना है कि पेयजल क्षेत्र की बड़ी समस्या है। जनप्रतिनिधि भी इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। क्षेत्र का प्रतिनिधिमंडल जल्द ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर इस समस्या के निराकरण की मांग करेगा।
टैंकरों से पेयजल आपूर्ति का दावा
बागपत। दावा यह है कि नौ गांवों में पानी के टैंकर भिजवाए जा रहे हैं, जिनसे पेयजल की आपूर्ति की जा रही है। लेकिन ग्रामीण कहते हैं कि दावा गलत है। कभी-कभार ही टैंकर आते है। बता दें कि एनजीटी ने यह भी आदेश दिया था कि शुद्ध पेयजल के लिए ग्रामीणों को टैंकरों से पानी सप्लाई होना चाहिए, लेकिन असल में ऐसा हो नहीं रहा।
क्या कहता है जल निगम
जल निगम का कहना है कि एनजीटी ने 55 गांव का आदेश दिया था। इनमें 21 गांव के अलावा टीकरी और दोघट कसबे में पाइप पेयजल योजना से पानी की आपूर्ति हो रही है। जैवाबाद एवं कोहनाबाद गैर आबाद गांव हैं।
बाकी बचे 30 गांव में से बिराल और बिजरौल के लिए जलकल परिसर के लिए जगह उपलब्ध नहीं है। सरौरा की आबादी कम है। बाकी बचे 27 गांव के लिए 3647 लाख का बजट भेजा गया, लेकिन अभी धनराशि नहीं मिली।