बागपत। अश्व प्रजाति में होने वाली ग्लैंडर्स फारसी की बीमारी से बचाव के लिए पशुपालन विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी गई है। पशु चिकित्सकों ने बिनौली ब्लाॅक क्षेत्र से घोड़े, खच्चर और गधो के 40 नमूने लेकर जांच के लिए हिसार लैब भेज दिए हैं। हिसार लैब से आने वाली रिपोर्ट से ही उनकी जिंदगी व मौत तय होगी।
पशु चिकित्सकों के अनुसार ग्लैंडर्स फारसी खतरनाक और लाइलाज बीमारी है, जो अश्व प्रजाति के घोड़े, खच्चर और गधों में पाई जाती है। ग्लैंडर्स फारसी के लक्षण मिलने पर घोड़े को मार दिया जाता है। संक्रमित घोड़ों के संपर्क में आने वालों की भी जान पर खतरा बन जाता है। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डाॅ. अरविंद त्रिपाठी ने बताया कि हर महीने 40 सैंपल लेकर जांच कराई जा रही है। इस महीने बिनौली ब्लाॅक क्षेत्र के ईंट भट्ठों, गांवों पर रखे गए घोड़ों, खच्चरों और गधो के सैंपल लेकर जांच के लिए हिसार लैब भेज दिए गए हैं। रिपोर्ट आने पर कार्रवाई की जाएगी।
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40 सैंपल बर्ड फ्लू की जांच को भेजे
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डा. अरविंद त्रिपाठी ने बताया कि बदलते मौसम को देखते हुए बर्ड फ्लू का खतरा भी बढ़ गया है। जिसको देखते हुए बिनौली ब्लाक क्षेत्र के मुर्गी फार्म से 40 सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे गए है।
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