बड़ौत। बिनौली रेलवे क्राॅसिंग के पास बृहस्पतिवार को चैकरेल बांधने का काम किया गया। इस दौरान तकरीबन तीन घंटे फाटक बंद रहा। आवागमन को लेकर लोग परेशान रहे। मजबूरी में लोग बाइक, स्कूटी और साइकिल से रेल पटरी पार करते नजर आए। वहीं कार, ट्रैक्टर सहित अन्य बड़े वाहनों को पांच किमी का अतिरिक्त फेर करना पड़ा। इस दौरान गर्भवती महिलाएं और बीमार लोग भी परेशान दिखाई दिए।
बुधवार की रात दिल्ली-सहारनपुर रेलवे मार्ग पर पुरानी हो चुकी पटरियों का बदलने का काम किया गया था। उस समय आवागमन काफी कम रहा था। पटरियों को बदलने के बाद बृहस्पतिवार को बिनौली रेलवे क्रांसिग के पास ट्रेनों के पहिया को रास्ता देने के लिए बदली गई पटरियों पर चैकरेल बांधी गई, जिस कारण सुबह 11 बजे फाटक बंद कर दिया गया और तकरीबन दो बजे फाटक खुला।
इस दौरान तीन घंटे फाटक बंद होने से बड़ौत, वाजिदपुर, लौहड्डा, जौहड़ी, आरिफपुर खेड़ी, रंछाड़, सिरसली, जिवाना गुलियान, माखर, बिजवाड़ा, बरनावा, बिनौली सहित तकरीबन 20 से अधिक गांवों के लोग बड़ौत में प्रवेश करने को लेकर परेशान रहे।
- कंधों पर बाइक ले जाकर रास्ता करना पड़ा पार
रेलवे फाटक बंद होने से इन गांवों के लोग पटरी पार करके आवागमन करते हैं। लोगों को मोटरसाइकिल भी चार कंधों पर ले जाकर रास्ता पार करना पड़ता है। किसी ने साईकिल तो किसी ने बाइक और स्कूटी रेलवे पटरी से पार की, तब जाकर वे अपने गंतव्य तक पहुंचे।
- बीमार और गर्भवती महिलाओं को रही सबसे ज्यादा दिक्कतें
तीन घंटे फाटक बंद होने से सबसे ज्यादा दिक्कतें बीमार और गर्भवती महिलाओं को हुई। कुछ लोगाें ने तो फाटक के नीचे से गुजरकर ई-रिक्शा का सहारा लिया और बीमार और गर्भवती महिलाओं को अस्पताल ले जाया गया।
- पांच किमी का करना पड़ा फेर
रेलवे फाटक बंद होेने से कार, ट्रैक्टर और अन्य बड़े वाहनों को दिक्कतें हुईं। ऐसे में वाहन चालकों को पहले लौहड्डा जाना पड़ा, फिर लौहड्डा से होते हुए बड़ौत-मुजफ्फरनगर मार्ग पर आना पड़ा, तब जाकर वे बिजरौल रोड रेलवे क्राॅसिंग पार कर नगर में प्रवेश कर सके। तकरीबन पांच किमी का फेर अतिरिक्त करना पड़ा। बाद में फाटक खुलने के बाद ही लोगों का आवागमन शुरू हो सका और उन्होंने राहत की सांस ली।