रटौल। मौसम की मार ने आम के बागवानों की चिंता बढ़ा दी है। पेड़ों पर बौर कम होने से बागवानों को आम की पैदावार घटने की भी चिंता सताने लगी है। बौर कम होने से परेशान बागवानों को बार बार पेड़ों पर स्प्रे भी करना पड़ रहा है।
क्षेत्र में 500 एकड़ में आम के बागान है, जहां पैदा होने वाला रटौल का आम विदेशों में भी भेजा जाता है। बागवानों ने बताया कि प्रदूषण और मौसम की मार के चलते बागानों की फसल में भारी गिरावट आई। कुछ दिन पहले बारिश और ओलावृष्टि होने से बागानों में नुकसान हो गया। बागवानों ने बताया कि आम का बौर कम आने से इस बार पैदावार भी कम होगी और नुकसान उठाना पड़ेगा। उधर बौर पैदा करने के लिए बागवान कई तरीके भी आजमा रहे हैं। इसके तहत कई-कई बार पेड़ों पर स्प्रे किया जा रहा है और धुलाई भी करनी पड़ रही है।
ये कहना है बागवानों का
-फरवरी के आखिरी सप्ताह से आम बागानों में बौर आना शुरू हो जाता है, जो मार्च तक चलता है। गर्म दिन शुरू होते ही बौर निकल जाता है, लेकिन अचानक मौसम में बदलाव आने पर बारिश और ओलावृष्टि से ठंड बढ़ गई और बौर खराब हो गया। इसके अलावा कुछ पेड़ों पर बौर भी नहीं निकला। पेड़ों पर तापमान बढ़ाने के लिए दवाइयों का स्प्रे भी किया जा रहा है। - हबीब चौहान, रटौल
-इस बार ठंड अधिक होने से बागानों में 40 फीसदी ही बौर आया। जबकि अधिकांश बौर खराब होकर गिर गया तो कुछ में फंगस लग गया। आम के बौर को कीटों से बचाने के लिए धुलाई भी करानी पड़ रही है। - अब्दुल सलाम, रटौल
-शासन ने आम के बागानों की वजह से रटौल क्षेत्र को फल पट्टी घोषित किया है, जो अपनी मिठास के लिए प्रसिद्ध है। पिछले 10 साल से आम बागानों की हालत खराब होती जा रही है। प्रदूषण की वजह से हर साल पैदावार घट रही है। जिससे बागवान चिंतित है। - सुखबीर सिंह
-आम के पेड़ों पर आने वाला बौर कीटों के कारण खत्म हो जाता है। अबकि बार पेड़ों पर पहले की अपेक्षा काफी कम बोर आया है। जिससे बागवानों को नुकसान होने की आशंका है। कृषि वैज्ञानिक बागवानों की समस्या को देखते हुए क्षेत्र में कैंप लगाकर समाधान कराएं।- जुनैद फरीदी, चेयरमैन रटौल
आम के बागानों में बौर आने का अभी समय है, सर्दी थोड़ा देर तक चली तो बौर कम आ रहा है। इस बार आम का सीजन भी देरी तक चलेगा। फिर भी टीम को भेजकर दिखवाया जाएगा। - दिनेश कुमार अरुण, जिला उद्यान अधिकारी