एमबीए की परीक्षा में हुआ फर्जीवाड़ा
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बागपत। मदरसों के फर्जीवाड़े में पूर्व जिला अल्पसंख्यक अधिकारी सिंह प्रताप देव फंस गए है। केस की विवेचना के आधार पर पुलिस ने उनको आरोपी बना लिया है। उनकी गिरफ्तारी के प्रयास भी शुरू कर दिए है। फिलहाल प्रतापगढ़ में उनकी तैनाती होने के कारण वहां के पुलिस अफसरों को पत्र लिखा जा रहा है।
केस की विवेचना कर रहे एसआई नदीम असगर ने बताया कि विवेचना के आधार पर पता चला है कि वर्ष 2010 में तत्कालीन अल्पसंख्यक अधिकारी सिंह प्रताप देव ने नियम विरुद्ध मदरसों की मान्यता दी। इसीलिए उनको केस में आरोपी बनाया गया है। उनकी तैनाती फिलहाल प्रतापगढ़ में है। उनकी गिरफ्तारी के लिए वहां के पुलिस अफसरों को पत्र लिखा जा रहा है। असगर ने बताया कि इस मामले में मदरसा संचालक संजीव निवासी कंजनपुर घोपला (मेरठ) को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।
यह था मामला
बागपत। अफसरों को शिकायत मिली थी कि जनपद में फर्जी तरीके से मदरसे चल रहे हैं और बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ कर रहे हैं। अफसरों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच की तो मामला सहीं पाया गया था। मई 2016 में तत्कालीन जिला अल्पसंख्यक अधिकारी हाकिम सिंह ने आरोपी मदरसा संचालकों के खिलाफ संबंधित थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
23 मदरसों में से 18 फर्जी
बागपत। पुलिस सूत्रों की माने तो पूर्व जिला अल्पसंख्यक अधिकारी सिंह प्रताप देव ने 23 मदरसों की मान्यता दी थी। इनमें 18 मदरसे जांच में फर्जी पाए गए है। सभी संचालकों के खिलाफ कार्रवाई हो रही है।
केस के विवेचक की हो चुकी है हत्या
बागपत। सिंघावली अहीर थाने में दर्ज फर्जी मदरसों के केस की विवेचना कर रहे दारोगा सुखवीर सिंह की हापुड़ जाते समय पांच माह पूर्व हत्या हो चुकी है। वे केस की विवेचना के संबंध में ही वहां पर जा रहे थे।