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स्कूलों में रखी 34 लाख की खाद्य सामग्री बर्बाद

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कोरोना महामारी के चलते स्कूलों पर लटक गए थे ताले
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स्कूलों में रखी खाद्य सामग्री निकलवाना भूल गया था विभाग
शिक्षकों को मजबूरन यह खराब सामग्री फेंकनी पड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत (बागपत)। कोरोना संक्रमण रोकने के लिए सरकार के आदेश पर शिक्षा विभाग ने जनपद के स्कूलों बंद करा दिए थे। ऐसे में शिक्षा विभाग स्कूलों में रखी खाद्य सामग्री निकलवाना भूल गया। नतीजन स्कूलों की 70 दिन की बंदी से करीब 34 लाख रुपये की खाद्य सामग्री बर्बाद हो गई। शिक्षकों को मजबूरन खराब सामग्री फेंकनी पड़ी।
शिक्षा विभाग के अनुसार जनपद में प्राथमिक विद्यालय 332, उच्च प्राथमिक विद्यालय 192 व कम्पोजिट विद्यालय 136 हैं। जिनमें कुल 70 हजार 370 बच्चे पंजीकृत हैं। कोरोना संक्रमण के मद्देनजर जनपद के स्कूलों को गत 17 अप्रैल को बंद करा दिया था। जिससे कोरोना संक्रमण पर काबू पाया जा सके। इस दौरान शिक्षा विभाग के अधिकारी स्कूलों मेें बच्चों के मिड-डे मील के लिए रखे आटा, चावल, दाल, टमाटर, प्याज समेत अन्य खाद्य सामग्री को निकलवाना भूल गए। अब बृहस्पतिवार को फिर से सरकार के आदेश पर स्कूल खोले गए। जनपद के सभी स्कूलों में रखी तकरीबन 34 लाख की खाद्य सामग्री खराब हो चुकी थी। स्कूलों की रसाइयों मेें रखे टमाटर व प्याज से दुर्गंध उठ रही थी। वहीं, चावल व आटे में कीडे़ पड़ गए। ऐसे में शिक्षकों को खराब सामग्री फेंकनी पड़ी।
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बच्चों के लिए मिलती है खाद्य सामग्री
प्राइमरी स्कूल के प्रति बच्चा दो किलो राशन मिलता है। जिसमें 1.34 किलो गेहूं व 660 ग्राम चावल मिलता है। जूनियर स्कूल मेें प्रति बच्चे के हिसाब से दो किलो गेहूं व एक किलो चावल मिलता है। इसके अतिरिक्त दाल, घी, मसाला व हरी सब्जियां मिलती हैं। जूनियर स्कूल में प्रति बच्चा 7.45 रुपये व प्राइमरी में 4.95 रुपये प्रति बच्चा मिलता है। ऐसे में एक स्कूल में तकरीबन पांच हजार रुपये की खाद्य सामग्री बर्बाद हुई। इस तरह जनपद के कुल 660 स्कूलों में करीब 34 लाख रुपये खाद्य सामग्री बर्बाद हो गई।
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स्कूल बंदी के चलते हुआ नुकसान
एबीएसए विनोद वर्मा ने बताया कि 70 दिन तक स्कूल बंद होने से काफी खाद्य सामग्री खराब हुई है।
खाद्य सामग्री निकलवाने का आदेश नहीं मिला
पूर्व माध्यमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष नवनीत का कहना है कि शासन से स्कूल बंदी से पूर्व वहां रखी खाद्य सामग्री निकलवाने का आदेश नहीं मिला था। इसके चलते जनपद के स्कूलों मेें लाखों रुपये की खाद्य सामग्री बर्बाद हो गई।
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