बागपत। एमएसपी कानून बनाने समेत 12 मांगों को लेकर भाकियू कार्यकर्ताओं व किसानों ने बुधवार को कलक्ट्रेट को ट्रैक्टरों से भर दिया। जहां किसानों ने धरना देने के बाद डीएम को प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। वहां से जा रहे डीएम की गाड़ी के आगे ट्रैक्टर लगा दिए जो दूसरे रास्ते से कलक्ट्रेट से निकले। किसानों ने कलक्ट्रेट से जाते हुए सिसाना तक मार्च निकाला, जिससे जाम की स्थिति बनी रही।
भाकियू कार्यकर्ता व किसान काफी संख्या में जिलेभर से ट्रैक्टर लेकर बुधवार को कलक्ट्रेट पहुंचे। कलक्ट्रेट को ट्रैक्टरों से भर दिया गया और वहां डीएम कार्यालय के सामने ही भाकियू कार्यकर्ता व किसान धरना देकर बैठ गए। भाकियू जिलाध्यक्ष प्रताप गुर्जर ने कहा कि सरकार किसानों का उत्पीड़न कर रही है और उनपर गोलियां चलाई जा रही है। सरकार के सामने समस्याएं उठाई जा रही है, मगर उनपर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इसलिए ही किसान केवल अपनी मांगों को लेकर दिल्ली में आ रहे हैं। जिस तरह से महंगाई बढ़ रही है, उस तरह ही फसलों के दाम बढ़ाए जाने चाहिए और एमएसपी पर कानून लागू किया जाना चाहिए। भाकियू के अध्यक्ष रहे स्वर्गीय चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत को भी चौधरी चरण सिंह की तरह भारत रत्न दिए जाने की मांग की गई।
किसानों ने मांगों को लेकर हंगामा भी किया और विभिन्न 12 मांगों के लिए डीएम जितेंद्र प्रताप को प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। उसके बाद डीएम जाने लगे तो उनकी गाड़ी के आगे मुख्य गेट पर ट्रैक्टर लगा दिए गए। जिससे डीएम की गाड़ी फंस गई और दूसरे गेट से गाड़ी को कलक्ट्रेट से बाहर लेकर गए। इस दौरान जिलाध्यक्ष प्रताप गुर्जर, प्रदेश उपाध्यक्ष राजेंद्र चौधरी, शिवदत्त शर्मा, इंद्रपाल जाट, सोमेंद्र ढ़ाका, हिम्मत सिंह, प्रदीप धामा, नीरज ढ़ाका, महक सिंह, नीटू बोक्का, विनोद खेड़ा, विनोद चौधरी, सतीश पाबला आदि मौजूद रहे।
ट्रैक्टरों का जुलूस निकाला तो हाईवे पर जाम लगा
जिलेभर से ट्रैक्टर लेकर किसान पहुंचे तो कलक्ट्रेट के बाहर तक ट्रैक्टर खड़े करने पड़े, जिससे वहां कई बार जाम की स्थिति बनी। वहीं कलक्ट्रेट में धरना खत्म करने के बाद सभी ने अपने ट्रैक्टर लेकर सिसाना तक मार्च किया। जिससे नेशनल हाईवे पर काफी देर तक जाम की स्थिति बनी रही। ट्रैक्टरों को सिसाना के कट से वापस लेकर सभी किसान चले गए।
इन 12 मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा
-एमएसपी पर कानून जल्द बनाया जाए
-प्रदेश सरकार बिजली बिल को अपने वादे के अनुसार समाप्त करे
-निराश्रित गोवंश की समस्या से छुटकारा दिलाया जाए
-किसानों का गन्ना भुगतान ब्याज सहित दिलाया जाए
-नहरों की मरम्मत कराकर आखिरी छोर तक पानी पहुंचाया जाए
-किसानों के ट्रैक्टरों को कृषि यंत्र में शामिल किया जाए
-दस वर्ष पुराने ट्रैक्टरों का पंजीकरण रद्द न किया जाए
-किसान सम्मान निधि के छह हजार रुपये बढ़ाकर 25 हजार रुपये किए जाए
-गन्ने का दाम महंगाई को देखते हुए 450 रुपये प्रति क्विंटल किया जाए
-कृषि यंत्रों व टायरों को जीएसटी से बाहर किया जाए
-किसानों को कृषि हेतू डीजल पर पचास प्रतिशत छूट दी जाए
-किसान आंदोलन के समय शहीद किसानों के परिजनों को मुआवजा तत्काल दिया जाए