बागपत। एसपीआरसी काॅलेज के मैदान में तीन दिवसीय किसान मेले की शुक्रवार को शुरूआत हुई। जिसमें किसानों को उन्नत और जैविक खेती करने के टिप्स दिए और रसायन के प्रयोग से होने वाली बीमारियों के बारे में भी जागरुक किया गया। मेले में बागपत और सहारनपुर मंडल के आठ जिलों के किसानों ने प्रतिभाग किया।
तीन दिवसीय किसान मेले का शुभारंभ प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही और वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री केपी मलिक ने मां सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इसके उपरांत मेले में लगे स्टॉल का निरीक्षण किया और अच्छी खेती करने वाले किसानों से उत्पादों के बारे में भी जानकारी कर हौसला बढ़ाया। मेले में मेरठ, बागपत, हापुड़, गाजियाबाद, नोएडा, शामली और मुजफ्फरनगर जिले के 1470 किसानों ने प्रतिभाग किया। कृषि मंत्री ने सरकारी की योजनाओं की जानकारी देकर लाभ उठाने की अपील की। इस अवसर पर किसानों को गन्ने के अलावा अन्य फसलों की खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
- जैविक खेती से दूर होगी बीमारियां
तीन दिवसीय विराट कृषि मेले में किसानों को जैविक खेती के टिप्स दिए गए। जहां वक्ताओं ने कहा कि खेती में रसायनों का अत्यधिक प्रयोग होने से कैंसर जैसी खतरनाक बीमारियां भी बढ़ रही हैं। उन्होंंने कहा कि आर्गेनिक खेती अच्छी सेहत का राज है। आर्गेनिक खेती में पैदा की गई फसल शरीर को निरोगी बनाएंगी।
- किसानों को सौंपी ट्रैक्टरों की चाबी
विराट कृषि मेले में कृषि मंत्री ने किसानों को ट्रैक्टर की चाबी सौंपी। जिसमें रवि कुमार ककडीपुर, राहुल पंवार सांकरौद, नीरज सिसाना, यशपाल पट्टी चौधरान बड़ौत, रामवीर दोघट, ओमबती बुढ़सैनी को ट्रैक्टर की चाबी सौंपी गई।
- बासमती के लिए जाना जाता है बागपत
वक्ताओं ने कहा कि बागपत जिले में नौ जलवायु हैं। जो बासमती धान की खेती के लिए सबसे उपयुक्त हैं। बागपत जिले की पहचान बासमती के लिए होती है, जिसके चलते बासमती का जियो टैग भी मिल चुका है।
- किसानों ने बताई कामयाबी की कहानी
विराट किसान मेले में किसानों ने मंत्री के समक्ष अपनी समस्याएं रखी तो कुछ किसानों ने कामयाबी की कहानी भी बताई। ऐसे में किसानों ने मलकपुर मिल से गन्ना भुगतान दिलाने की मांग की।
- किसान को मंच से उतारने पर हो गया हंगामा
किसान मेले में एक किसान ने मलकपुर मिल से गन्ना भुगतान दिलाने की मांग की तो अधिकारियों ने उसे मंच से नीचे उतार दिया। जिसके बाद कुछ किसानों ने विरोध करते हुए हंगामा किया और समस्या को जायज बताया। इसके बाद कृषि मंत्री के आश्वासन पर किसान शांत हुए।