बागपत कोर्ट से पाते उर्फ साहब सिंह और रविन्द्र को जेल ले जाते पुलिसकर्मी
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बागपत। बालैनी क्षेत्र के गांव मवी कलां के किसान गोपी (75) की साढ़े छह साल पहले जमीन के रुपये के लेनदेन को लेकर हुई हत्या के मामले में चार आरोपियों को साक्ष्य के आधार पर कोर्ट ने दोषी मानकर आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इनमें से एक आरोपी की केस के विचारण के दौरान मौत हो चुकी है।
मवी कलां गांव निवासी साहब सिंह ने बालैनी थाने में दी तहरीर में बताया था 26 अगस्त 2010 को उसके ताऊ गोपी खेत में पशु चराने के लिए गए थे। शाम तक वापस घर नहीं लौटे तो तलाश करने पर बालैनी के जंगल (बनी) में ताऊ गोपी का शव पड़ा मिला था। उनके गले में कपड़ा बंधा था और शरीर पर चोट के निशान थे। अज्ञात में रिपोर्ट दर्ज हुई थी। पुलिस की विवेचना में सामने आया था कि गांव के दो सगे भाई लोकेंद्र और रविंद्र के अलावा पाते उर्फ साहब सिंह और जसवीर उर्फ जस्सू ने जमीन के रुपये के लेनदेन के विवाद में उनकी हत्या की है।
आरोपियों ने उनकी चिमटे से प्रहार कर हत्या की थी। पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त चिमटा बरामद कर लिया था। आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया था। डीजीसी सुनील पंवार ने बताया यह केस एडीजे (विशेष) शक्ति पुत्र तोमर की कोर्ट में चल रहा था। कोर्ट ने साक्ष्य के आधार पर चारों आरोपी रविंद्र, लोकेंद्र, पाते उर्फ साहब सिंह और जसवीर को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। आरोपियों पर दस-दस माह का अर्थदंड लगाया। धनराशि न देने पर तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। इस वारदात में शामिल रहे लोकेंद्र की केस के विचारण के दौरान मौत हो चुकी है।