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Exclusive: जंग लगने से कबाड़ हुए करोड़ों के ट्रांसफार्मरों, मरम्मत कराएं या कौड़ियों के भाव बेचें, उलझा निगम

Thu, 10 Aug 2023 03:26 PM IST
Dimple Sirohi मुकेश पंवार, अमर उजाला, बागपत/बड़ौत

सार

पिछले 13 साल से सैकड़ों फुंके हुए ट्रांसफार्मर मरम्मत की बाट जोह रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अभी तक यह निर्णय नहीं ले सके हैं कि करोड़ो के ट्रांसफार्मरों की मरम्मत कराएं या फिर स्क्रैप में भेजें।
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ट्रांसफार्मर की मरम्मत करते कर्मचारी
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विस्तार
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ऊर्जा निगम के अफसरों की घोर लापरवाही के चलते करोड़ों के ट्रासंफार्मर कौड़ियों के भाव के हो गए हैं। पिछले 13 साल से सैकड़ों फुंके हुए ट्रांसफार्मर मरम्मत की बाट जोह रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अभी तक यह निर्णय नहीं ले सके हैं कि करोड़ो के ट्रांसफार्मरों की मरम्मत कराएं या फिर स्क्रैप में भेजें। इसमें जहां विभाग पूरी तरह से उलझ गया है। वहीं दूसरी ओर ओवरलोड ट्रांसफार्मरों की वजह से लोग बिजली संकट झेल रहे हैं।

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आपको बता दें कि वर्ष 2009-2010 में वर्ल्ड बैक योजना के तहत सरकारी नलकूपों पर विद्युत ट्रांसफार्मर लगाएं गए थे, लेकिन देखरेख के अभाव के चलते धीरे-धीरे एक के बाद एक ट्रांसफार्मर फुंका गया। जिसके बाद विभागीय अफसरों ने फुंके ट्रांसफार्मरों की जगह दूसरे ट्रांसफार्मर स्थापित करा दिया और फुंके ट्रांसफार्मरों को मरम्मत के लिए संबंधित स्टोर सेंटर पर भेज दिया गया, लेकिन 13 साल बाद भी फुंके ट्रांसफार्मरों की आज तक मरम्मत नहीं कराई गई।

आपको जानकर ताज्जुब होगा कि पश्चिमाचंल के 15 स्टोर सेंटरों पर इस समय 1508 फुंके ट्रांसफार्मर रखे हुए है, जो जंग खाकर खराब होने की कगार पर है। अकेले बागपत में 183 ट्रांसफार्मर फुंके हुए है। सबसे ज्यादा फुंके हुए ट्रांसफार्मर सहारनपुर में 460, फिर मुजफ्फरनगर 213 ट्रांसफार्मर रखे हुए है, जो मरम्मत की बाट जोह रहे है, लेकिन आज तक निगम के जिम्मेदार यह तय नहीं कर पाए की फुंके ट्रांसफार्मरों की मरम्मत कराई जाए, या फिर इन्हें स्क्रैप में बेचा जाए। जिस कारण तकरीबन सात करोड़ रुपयों के ट्रांसफार्मर जंग लगने से खराब हो रहे।

ओवरलोड से हांफ रहे ट्रांसफार्मर
जहां एक ओर विभागीय अधिकारी फुंके ट्रांसफार्मरों की मरम्मत नहीं करा पा रहे है, वहीं दूसरी ओर जनपद में कुछ ट्रांसफार्मरों को छोड़कर अधिकांश ट्रांसफार्मर ओवरलोड से हांफ रहे है। आए दिन ओवरलोड ट्रांसफार्मरों के फुंकने की वजह से लोगों को बिजली संकट से जूझना पड़ता है।
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यह भी है कारण
यदि विभाग इन फुंके ट्रांसफार्मरों की मरम्मत कराता है तो एक ट्रांसफार्मर की मरम्मत कराने में नए ट्रांसफार्मर की आधी कीमत का खर्च आता है यानी एक ट्रांसफार्मर की मरम्मत में लगभग 30 हजार विभाग का खर्च आता है, जबकि नया ट्रांसफार्मर 50 से 60 हजार में आ जाता है। वहीं यदि विभाग इन ट्रांसफार्मरों को स्क्रैप में देने की सोचता है तो एक ट्रांसफार्मर मात्र 8 से 10 हजार में जाएगा। ऐसे में विभागीय अधिकारी दस साल बीत जाने के बाद भी आज तक कोई ठोस निर्णय नहीं ले सके।
 
स्टोर पर फुंके ट्रांसफार्मरों को सुरक्षित रखा गया है, जैसे ही विभागीय अफसरों का कोई आदेश प्राप्त होता है, उसी के अनुरूप आगे की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी- दीपांश कुमार सहायक अभियंता स्टोर बड़ौत।

स्टोर का नाम फुंके ट्रांसफार्मरों की संख्या
बड़ौत             183
बुलंदशहर             31
बिजनौर             18
धामपुर                        3
गाजियाबाद             23
हापुड                         5
मुरादाबाद             102
जेपी नगर             192
मेरठ स्टोर सेंटर             85
मोदीनगर                        3
मुजफ्फरनगर             213
रामपुर                         105
सहारनपुर                        460
संभल                         1
शामली                         83
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