फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जिला बागपत में हर नौंवा बच्चा कुपोषित और 29 वां अतिकुपोषित

Tue, 18 Apr 2017 12:57 AM IST
अमर उजाला / ब्यूरो/ बागपत
विज्ञापन
विज्ञापन
बागपत। बच्चों के स्वास्थ्य पर सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन इसके बाद भी कुपोषण कम होने का नाम नहीं ले रहा है। जिले का हर नौंवा बच्चा कुपोषण का शिकार है। अति कुपोषित बच्चों की संख्या भी काफी अधिक है। अफसर इसके लिए अभिभावकों में जागरूकता की कमी मान रहे हैं।
विज्ञापन


कुपोषण से जिले को मुक्ति दिलाने के लिए विभिन्न योजनाएं चल रही हैं। गर्भवती महिलाओं की देखरेख का नियम है। एएनएम, क्षेत्र की आशाओं के सहयोग से गर्भवती का टीकाकरण करती है। समय-समय पर खून की जांच कराती है। उनको कैल्शियम और आयरन की गोली दी जाती है। इसके बाद भी जिन महिलाओं के बच्चे कुपोषित और अति कुपोषित पैदा होते हैं। इनकी देखरेख अलग से की जाती है।

इसके लिए जिला अस्पताल में पोषण पुनर्वास केंद्र   (एनआरसी) बना है।  जिले में 1.28 लाख बच्चे हैं। इनमें से 13350 बच्चे कुपोषण के शिकार है। अति कुपोषित बच्चों की संख्या 43 सौ है। ऐसे में सवाल उठता है कि सरकार के करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद कुपोषण क्यों।
विज्ञापन


खानपान से अलग हर रोज 50 रुपये  मिलते हैं एनआरसी में 

बागपत। जिला कार्यक्रम अधिकारी शशि वार्ष्णेय ने कहा बच्चों के स्वास्थ्य पर पूरा ध्यान दिया जाता है। अभिभावकों को हर संभव जागरूक करने का प्रयास किया जाता है। समय से कुपोषित और अति कुपोषित बच्चों को एनआरसी में नहीं ले जाते हैं। हालत बिगड़ने पर वहां पर ले जाया जाता है। उन्होंने बतायाएनआरसी में जो भी बच्चा भर्ती होता है, उस समय बच्चे के साथ ही मां को भी खानपान दिया जाता है। इसके अतिरिक्त 50 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से दिए जाते हैं। 

छह बच्चे भर्ती हैं एनआरसी में 

बागपत। जिला अस्पताल में बने पुनर्वास केंद्र ( एनआरसी) में फिलहाल छह बच्चे भर्ती है। इनमें मलकपुर गांव का शिवम, बसी निवासी मयंक, खेकड़ा कस्बा निवासी देवांश, निवाड़ा का सेफयान, गल्हैता की गुनगुन और काठा गांव का सौरभ शामिल हैं। 
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें