साक्षरता एवं वैकल्पिक शिक्षा विभाग ने शुरू की थी साक्षर भारत योजना
इसके अंतर्गत चार साल पहले कार्य कर चुके शिक्षा प्रेरक
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। योजना समाप्त होने के चार साल बाद शासन को शिक्षा प्रेरकों की याद आई है। शासन ने बेसिक शिक्षा विभाग को साक्षरता अभियान अंतर्गत साक्षर किए गए निरक्षरों का सत्यापन तथा शिक्षा प्रेरकों के मानदेय की जांच करने के निर्देश दिए हैं।
15 साल से अधिक आयु के निरक्षरों को साक्षर करने के लिए साक्षरता एवं वैकल्पिक शिक्षा विभाग की ओर से साक्षर भारत योजना चलाई गई थी। इसके अंतर्गत ग्राम पंचायत व न्याय पंचायत स्तर पर दो हजार रुपये प्रतिमाह के मानदेय पर शिक्षा प्रेरक नियुक्त किए गए थे। विभाग की ओर से शिक्षण के उपरंात निरक्षरों की परीक्षा के बाद उनके प्रमाण पत्र भी जारी किए गए थे। वर्ष 2018 में योजना को बंद कर दिया गया।
जिले में शिक्षा प्रेरक पिछले चार साल से मानदेय की बांट जोह रहे हैं। जिले में दो सौ से अधिक प्रेरकों का पिछले चार साल से मानदेय का भुगतान नहीं हुआ है। अब शासन ने चार साल बाद प्रेरकों के मानदेय का भुगतान करने के लिए प्रेरकों के मानदेय की जांच और निरक्षरों का सत्यापन करने के निर्देश दिए हैं। वैकल्पिक शिक्षा के जिला समन्वयक राजपाल जैन्थ ने बताया कि शासन ने अभियान के अंतर्गत निरक्षरों का सत्यापन और प्रेरकों के मानदेय की जांच करने के निर्देश दिए हैं। जांच कर रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।