बागपत। घरेलू हिंसा लोगों को मानसिक रोगी बना रही है। जिला अस्पताल में काउंसलिंग के दौरान घरेलू हिंसा के मामले अधिक आ रहे हैं। सबसे अधिक महिला मानसिक बीमारी का शिकार हो रही हैं। अस्पताल में जांच के लिए पहुंच रहे दस मरीज में से छह महिला मरीज हैं।
जिले में महिला अधिक मानसिक रोगों का शिकार हो रही हैं। जिला अस्पताल की ओपीडी में आने वाली अधिकांश महिलाएं घर परिवार में होने वाली कलह के कारण बीमारी का शिकार हो रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि महिलाएं एक ही बात को बार-बार सोचती रहती हैं। जिससे उनकी सोचने की शक्ति प्रभावित होने लगती है और वह मानसिक रोगी हो जाती हैं। ऐसे मरीजों को घबराहट होना, छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आता है। इसके अलावा परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होना भी मानसिक बीमारी का कारण बन रहा है। घर परिवार के बारें में अधिक सोचना और नींद पूरी न होने के कारण भी लोग मानसिक रोगी हो रहे हैं।
विवाद या परेशानी होने पर बार-बार सोचना डिप्रेशन में पहुंचा रहा
मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. अजय कुमार का कहना है कि महिलाएं घर में अकेली रहती है। घर में कोई विवाद या परेशानी होने पर वह बार-बार इसी के बारे में सोचती रहती हैं, जिससे वह डिप्रेशन में चली जाती हैं। जिला अस्पताल में आने वाली अधिकांश महिलाएं पारिवारिक विवाद और आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण मानसिक बीमारी का शिकार हो रही है। कांउसलिंग के दौरान मरीजों को तनाव न लेने का परामर्श दिया जाता है। मानसिक रोगियों को दवा के साथ नियमित योग की भी सलाह दी जाती है।
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ये है बीमारी के लक्षण
-समय पर नींद न आना या देर से आना
-घबराहट, तनाव और काम में मन न लगना
-भूत-प्रेत, देवी-देवता की छाया या भ्रम होना
-याददाश्त की कमी होना और चिड़चिड़ापन
-मिर्गी, बेहोशी या अन्य किसी प्रकार के दौरे आना
-सोचने और दैनिक कार्य करने में कठिनाई होना
-मन में बार-बार गलत विचारों का आना
-चिकित्सक की सलाह के बिना किसी दवाई का सेवन करना
-शराब या तंबाकू का अधिक सेवन करना
-व्यवहार में अचानक से बदलाव आना