खेकड़ा (बागपत)। जिला जेल से एक बंदी के फोटो सोशल मीडिया पर वायरल होने के मामले में डीजी जेल ने बागपत जेल अधीक्षक से रिपोर्ट तलब की है। जेल अधीक्षक ने रिपोर्ट भेज दी है। इस रिपोर्ट को गलत बताते हुए नूतन ठाकुर ने जेल अधीक्षक के खिलाफ भी कार्रवाई करने की मांग की है।
बागपत जिला जेल शुरू से ही चर्चा में रही है। मुन्ना बजरंगी हत्याकांड हो या फिर जेल वैन से बंदी फरार होने का मामला। बागपत जिला कारागार के एक बंदी की जेल के अंदर की फोटो सोशल मीडिया पर वायरल होने का मामला बुधवार को छाया रहा। जेल में बंद अपराधियों की फोटो सोशल मीडिया पर वायरल होने का मामला लखनऊ तक गूंज रहा है। डीजी जेल आनंद कुमार ने जिला जेल प्रशासन से इस संबंध में रिपोर्ट मांगी थी। बागपत जिला जेल की यह तस्वीरें पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर ने ट्वीट की थीं। इन तस्वीरों के साथ ट्वीट में डीजीपी और डीजी जेल को टैग किया था। फोटो बागपत जेल की हैं या नहीं इसे लेकर भी बातें चल रही हैं।
जेल अधीक्षक ब्रजेंद्र कुमार सिंह ने बताया बड़ौत क्षेत्र के गांव सिरसली निवासी बंदी आयुष सात माह पूर्व (26 नवंबर 2020 को) खेकड़ा के एमएम डिग्री कॉलेज में बनाई गई अस्थायी जेल में रहा था। बाद में इसे मुख्य जेल के कोविड वार्ड में रखा गया। वहां यह मात्र 20 दिन तक रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए फोटो की लोकेशन जिला जेल की नहीं है। फोटो में साथ खड़े दिखाई दे रहे बंदी भी इस जेल में कभी नहीं रहे। रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेज दी गई है। इस रिपोर्ट को अमिताभ ठाकुर की पत्नी ने गलत करार दिया है। उन्होंने डीजी जेल से दोबारा शिकायत की है। उन्होंने शिकायत में कहा कि ये फोटो आयुष तोमर के फेसबुक पेज पर जून 2019 से अक्तूबर 2019 के बीच की हैं, न कि 2020 -21 की हैं। जानकारी के अनुसार आयुष तोमर पूर्व में जब भूपेंद्र तोमर हत्याकांड में अक्तूबर 2017 से 2019 में बागपत जेल में था, ये फोटो उसी समय के हैं। ऐसे में इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जानी चाहिए। यदि जेल अधीक्षक की रिपोर्ट गलत पाई जाती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाए।