बागपत। ग्राम पंचायतों में तैयार होने वाली कार्ययोजना में महत्वपूर्ण कार्यों की उपेक्षा हो रही है। इसके चलते कार्ययोजना में प्राथमिकता निर्धारित की गई है। कूड़ा निस्तारण, पाइप लाइन पेयजल व्यवस्था, कुआं एवं पेयजल स्रोतों का पुनरूद्धार, गोवंश आश्रय स्थल, वनीकरण को प्राथमिकता दी जाएगी।
राज्य वित्त एवं केंद्रीय वित्त आयोग की संस्तुतियों पर ग्राम पंचायतों को मिलने वाली धनराशि अनटाइड फंड के रूप में उपलब्ध कराई जाती है। जिसके माध्यम से पंचायतों में विकास के लिए कार्ययोजना बनाई जाती है। शासन ने वर्ष 2019-20 में बनाई गई कार्ययोजना को प्लान-प्लस सॉफ्टवेयर पर अपलोड कर रखी है। जिसका प्रमुख सचिव अनुराग श्रीवास्तव ने परीक्षण कराया तो उसमें ऐसे कार्य उपेक्षित मिले जो जनहित में किए जाने चाहिए थे। इसमें पंचायतों को हैंडओवर होने वाली पाइप लाइन पेयजल परियोजना का सामान्य अनुरक्षण, परिचालन, बिजली बिलों का भुगतान, हैंडपंपों की मरम्मत है। ठोस-तरल अपशिष्ट प्रबंधन, भूजल पुनर्भरण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, कुएं, अन्य पेयजल स्रोतों का पुनरूद्धार एवं विकास, गोवंश आश्रय स्थलों का विकास और वनीकरण जैसे महत्वपूर्ण कार्यों को छोड़ दिया जाता है। इन सभी महत्वपूर्ण कार्यों को 2020-21 की कार्ययोजना में जोड़ा जाएगा। जिसके माध्यम से गांवों का विकास हो सके और ग्रामीणों को सुविधाएं मिले। डीपीआरओ कुमार अमरेंद्र ने बताया कि शासन के आदेशानुसार कार्रवाई की जा रही है। ग्राम सचिव और प्रधानों को इससे अवगत कराया जा चुका है।