डेनमार्क से कुछ लोग झूंडपुर गांव में भ्रमण पर आए हैं। उन्होंने ग्रामीण संस्कृति को देखकर खुशी जताई। इस दौरान उन्होंने चने के साग व मक्का की रोटी का आनंद भी उठाया। तीनों विदेशियों का ग्रामीणों ने फूल-मालाओं से जोरदार स्वागत किया।
झूंडपुर गांव निवासी बिट्टू पुत्र सुखपाल ने बताया कि वर्ष 2008 में बोब डेरिस, विली, अरनेस्ट जेनसेन निवासी डेनमार्क से उनकी मुलाकात गोवा में हुई थी। तभी से ही उनके बीच गहरी दोस्ती है। ये तीनों पहले भी दो बार झूंडपुर गांव में उनके घर आ चुके हैं। बोब डेरिस ने कहा कि उन्हें इंडियन संस्कृति बहुत पसंद है। गांव के लोगों की सादगी उन्हें यहां खींच लाती है।
ग्रामीण भारत को जानने का उन्हें सौभाग्य मिला है। उन्हें यहां के लोग, गुड़, गन्ना, कोल्हू, खान-पान, साग-रोटी, मट्ठा, दूध, दही बहुत पसंद हैं। यहां के खानपान का जो टेस्ट है, उन्हें कहीं नहीं मिला। वे तीन दिन गांव में रहकर मौज-मस्ती करेंगे।
रविवार को ग्रामीणों ने उन्हें भैंसा-बोगी, जुगाड़ की सवारी कराई। इसके बाद वे खेतों में भ्रमण पर गए। उनसे मिलने के लिए ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई। उन्होंने ग्रामीणों के बीच बैठकर काफी बातचीत की और फोटोग्राफ भी लिए। उन्होंने भैंसों का दूध भी निकाला। उनका स्वागत करने वालों में चौधरी सुखपाल सिंह, कृष्णपाल, पिंटू मिश्रा, अरविंद पाराशर, दीपक उर्फ भीम, सूबे सिंह, धारा सिंह, सुनील, सतीश, संजू देशवाल, प्रकाश आदि शामिल रहे।