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Baghpat News: कागजों के मुर्दे-जिंदा होने के लिए भटक रहे, कार्रवाई न गले पड़ जाए-अधिकारी भी नहीं सुन रहे दर्द

Fri, 26 Sep 2025 12:55 AM IST
मेरठ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागपत

सार

बागपत जनपद के ट्योढ़ी, फतेहपुर पुट्ठी, हेवा और बड़ौली के कई बुजुर्गों की पेंशन कागज़ों में मृत दिखाने के बाद बंद कर दी गई। एक-एक साल से ये लोग अधिकारियों के दफ्तरों में जिंदा होने का प्रमाण दिखाकर भटक रहे हैं, पर अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
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बुजुर्ग दंपती
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विस्तार
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यहां कई बुजुर्गों को कागजों में मरा हुआ दिखाकर पेंशन बंद कर दी गई तो कागजों में मुर्दे बने इन बुजुर्गों को अब जिंदा होने के लिए भटकना पड़ रहा है। बागपत जनपद के ट्योढ़ी, फतेहपुर पुट्ठी, हेवा, बड़ौली के ये बुजुर्ग एक-एक साल से अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। इनको मरा हुआ दिखाने वाले सचिवों पर कार्रवाई करनी पड़ेगी इसलिए इनका दर्द अधिकारी भी नहीं सुन रहे हैं।
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पेंशन के पात्रों का हर साल सचिवों के माध्यम से सत्यापन कराया जाता है। यहां पिछले साल सत्यापन करते हुए काफी बुजुर्गों को कागजों में मृतक दिखा दिया गया। उनकी पेंशन कई महीने तक नहीं आई तो वे समाज कल्याण विभाग के कार्यालय पहुंचे। वहां उनको कागजों में मृतक दिखाए जाने का पता चला। उसके बाद से एक साल हो चुका है और वह अधिकारियों के कार्यालयों में भटक रहे हैं। इसके बावजूद उनकी पेंशन शुरू नहीं की जा रही है जबकि कई ऐसे बुजुर्ग हैं जिनको कई-कई साल से पेंशन मिल रही थी।

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केस एक : प्रकाशचंद चक्कर काटकर थक चुके
ट्योढ़ी गांव के प्रकाशचंद को तीन साल पहले वृद्धावस्था पेंशन मिलनी शुरू हुई। उनको सचिव ने सत्यापन करते हुए कागजों में मृतक दिखाकर रिपोर्ट भेज दी। पिछले एक साल से पेंशन नहीं मिल रही है। समाज कल्याण विभाग कार्यालय से लेकर अन्य अधिकारियों के चक्कर काटकर थक चुके हैं। पेंशन अभी तक नहीं मिली है।

केस दो : पेंशन का सुख लेकर अब दुख झेल रहीं रामकली
फतेहपुर पुट्ठी की रहने वाली रामकली की पांच साल पहले पेंशन शुरू हुई थी। इनको एक साल पहले सत्यापन में मृत बताकर पेंशन बंद करा दी गई। पेंशन नहीं आने पर अधिकारियों के कार्यालय में जाकर दिखवाया तो पता चला कि उनको मृत घोषित कर दिया गया है। तभी से अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर काट रही हैं मगर अभी तक पेंशन शुरू नहीं हो सकी।
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केस तीन : पति की मौत के बाद सहारा बनीं पेंशन भी बंद हुई
हेवा गांव की बेदो के पति मलखान की 16 साल पहले मृत्यु हो गई तो पेंशन से बड़ा सहारा मिला। सचिव की लापरवाही से वह सहारा भी छिन गया। बेदो की पेंशन एक साल पहले बंद हुई तो बेदो ने कई बार अधिकारियों के पास चक्कर काटे। पता चला कि उनको भी मृत दिखा दिया गया। अब खुद को जिंदा साबित करके पेंशन शुरू कराना चाहती हैं मगर सरकारी सिस्टम उनको जिंदा नहीं होने दे रहा है।

केस चार : शाहपुर बड़ौली गांव के छंगे की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है और पेंशन से काफी सहारा मिलता था। एक साल पहले इनको भी कागजों में मरा हुआ दिखा दिया गया। एक साल में छह से सात बार विकास भवन व कलक्ट्रेट के चक्कर काट चुके हैं मगर कोई सुनवाई नहीं हो रही है। उनको व कागजों को देखकर जिंदा मानकर भी पेंशन शुरू नहीं की गई।
 
जिनको भी मृतक दिखाकर पेंशन बंद की गई है। उनकी जांच कराई जाएगी और जिसने भी उनको मृतक दिखाया है उनपर कार्रवाई की जाएगी। ऐसे बुजुर्गों की पेंशन भी जल्द शुरू कराई जाएगी। - नीरज कुमार श्रीवास्तव, सीडीओ
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