बागपत में बैंकों की तीन दिन की छुट्टियों के चलते रविवार को भी लोग एटीएम के भरोसे ही रहे। हालत यह रही कि कैश खत्म हो जाने के कारण अधिकतर के शटर ही नहीं उठे।
जो खुले रहे, वहां लंबी-लंबी कतारें लगी रहीं। शहर के एक ही एटीएम से नोट निकल रहे थे, जहां भारी भीड़ थी। इस दौरान लोगों ने हंगामा भी किया। नोटबंदी के फैसले के बाद से लोग परेशान हैं।
वकाश के दिनों में तो व्यवस्था बेपटरी हो गई है। शहर के अधिकांश एटीएम के शटर गिरे रहे। केवल एसबीआई के एक एटीएम से कैश मिल रहा था। वहीं लोगों की भारी भीड़ रही। महिलाओं को भी घंटों तक लाइन में लगाना पड़ा।
बच्चे मां के साथ कैश निकलने का इंतजार देखते रहे। लोनी, बड़ौत और अन्य दूरदराज के क्षेत्रों से लोग एटीएम की लाइन में लगे रहे। वहीं बैंक के सामने और आस-पास व्यापार करने वाले लोगों को भीड़ के चलते असुविधा हो रही है।
कों या एटीएम के बाहर दुकानों के सामने बाइकें खड़ी हो जाती हैं। इस कारण दुकान पर ग्राहकों को सामान खरीदने आने में समस्या होती है। कई बार तो दुकान के बाहर बाइक खड़ी करने को लेकर लोगों की व्यापारियों के साथ नोकझोंक तक हो जाती है।
कई व्यापारी व्यवस्था बनाए रखने के लिए लाइन से बाइकों को खड़ा करा रहे हैं। वहीं बड़ौत में सीनियर सिटीजन्स वेलफेयर एसोसिएशन की दयानंद बाल विद्या मंदिर में हुई बैठक में केंद्र सरकार द्वारा चलाए गए नोटबंदी के दौरान जन साधारण को परेशानी उठानी पड़ रही है।
उन्होंने तत्काल नोटबंदी की योजना में सुधार करने की मांग की है। डॉ. हरपाल सिंह की अध्यक्षता व प्रीतम सिंह वर्मा के संचालन में हुई बैठक में सदस्यों का कहना है कि नोटबंदी में बैंक कर्मचारियों द्वारा कथित रूप से धांधलीबाजी की जा रही है।
निष्पक्षता से वे अपनी ड्यूटी नहीं दे रहे हैं। धन वितरण में केंद्र सरकार की नीति प्रति सप्ताह 24 हजार देने में पक्षपात किया जा रहा है। बैठक में निर्णय लिया गया कि एलडीएम बागपत से मिलकर वस्तु स्थिति से अवगत कराया जाएगा और 500-500 रुपये का शीघ्र संचालन कराया जाएगा।
उन्होंने मांग की कि वितरण नीति में धांधलीबाजी की जांच कराई जाए और दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई हो। एसोसिएशन के सदस्यों का कहना है कि बैंक में कितनी धनराशि वितरण के लिए प्राप्त हुई।
किस प्रकार वितरण किया गया। विवरण उपभोक्ताओं जो लाइन में लगे हैं उसके समक्ष रखा जाए। बैठक में ओमवीर सिंह, हरपाल सिंह, जयवीर चौहान, धर्मपाल, शिवनारायण, धर्मवीर, श्याम सिंह, ऋषिपाल तोमर, हाजी जमीरूद्दीन अब्बासी, नरेंद्र, मांगेलाल जैन, जलसिंह, दयाराम तोमर आदि रहे।