- सर्वश्रेष्ठ सृजनशील दिव्यांग व्यक्ति की श्रेणी में राज्य स्तरीय पुरस्कार पाकर गदगद हुई ओमबीरी
- ओमबीरी बोली, बेटियां पढ़ लिखकर आगे बढ़े, कभी भेदभाव का शिकार न बने
- ग्रामीण परिवेश में शिक्षा की अलख जगाने का किया काम
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। निनाना गांव की रहने वाली सेवानिवृत्त शिक्षिका ओमबीरी देवी दोनों पैरों से दिव्यांग है, लेकिन उसके हौसले से कई गांवों की बेटियां उड़ान भर रही है। सर्वश्रेष्ठ सृजनशील दिव्यांग व्यक्ति की श्रेणी में राज्य स्तरीय पुरस्कार पाकर ओमबीरी देवी गदगद है। उनका कहना है कि बेटियां पढ़ लिखकर आगे बढ़े और कभी भेदभाव का शिकार न बनें।
फैजुल्लापुर गांव में एक जुलाई 1959 को जन्मी ओमबीरी बचपन में ही पोलियो से दोनों पैरों से दिव्यांग हो गई थी, लेकिन ओमबीरी के इरादे अलग थे और उसने लेकिन दिव्यांगता को कभी अपने इरादों के आड़े नही आने दिया। ओमबीरी देवी ने कड़े संघर्ष के बाद बीए और बीएड करने की पढ़ाई पूरी की। जिसके बाद 1984 में मुफ्त स्कूल खोलकर बच्चों को पढ़ाना शुरू किया और बाद में प्रौढ़ शिक्षा केंद्र खोलकर बुजुर्ग महिलाओं को पढ़ाया। इसके बाद हर बालिका को शिक्षा का अधिकार दिलाने की ठानकर ओमबीरी देवी ने अपने गांव अलावा पड़ोसी गांवों में जाकर अभिभावकों को बेटियों को शिक्षित करने के लिए मनाया और बेटियों को स्कूल तक पहुंचाकर शिक्षित किया। ओमबीरी देवी का कहना है कि ग्रामीण इलाके में लोग बेटियों को स्कूल भेजने से कतराते थे, लेकिन अब बेटियों का दाखिला पहले कराया जाता है।
1993 में बालिकाओं के लिए खोला स्कूल
निनाना गांव की रहने वाली दिव्यांग ओमबीरी देवी सेवानिवृत्त हो चुकी हैं। उन्होंने वर्ष 1993 में बालिकाओं की शिक्षा के लिए फैजुल्लापुर गांव में एक कन्या पाठशाला का संचालन शुरू किया था। जो बाद में कुंदनलाल जैन कन्या जूनियर हाईस्कूल के रूप में संचालित है।