बड़ौत में दशलक्षण पर्व के पांचवें दिन उत्तम सत्य धर्म को अंगीकार कर जैन अनुयायियों ने मंदिरों में विशेष पूजा अर्चना की। वहीं, मंदिरों में चल रहे विधानों में पूजा और अर्घ्य चढ़ाए गए। उधर, विहर्ष सभागार में आयोजित धर्मसभा में आचार्य विमर्श सागर महाराज ने कहा कि मुनियों की कथनी और करनी एक होती है। इसलिए उत्तम सत्य मुनि के पास होता है। मुनि दीक्षा लिए बिना मोक्ष नहीं मिलता।
दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में आर्यिका प्रत्यक्षमति माता के सानिध्य में चल रहे तेरहद्वीप महामंडल विधान में सबसे पहले भगवान चंद्रप्रभु का अभिषेक विधिपूर्वक किया। पंडित नरेशचंद जैन शास्त्री के निर्देशन में नित्य नियम की पूजा की गई। बीच-बीच में इंद्र-इंद्राणियों ने मनमोहक व भक्ति भाव से नृत्य किया।
उधर, छोटा जैन मंदिर और अतिथि भवन में दिगंबर जैन युवा समिति के तत्वावधान में चल रहे विधान में पूजा की गई। सायंकाल काल बड़ा जैन मंदिर, छोटा जैन मंदिर व अतिथि भवन में भगवान की आरती हुई। इसके बाद , कलाकारों ने एक धार्मिक नाटिका प्रस्तुत की, जिसमें उत्तम सत्य धर्म की महत्ता बताई।
इस अवसर पर अशोक जैन, आदीश जैन, नरेश जैन, संजीव जैन, सुदेश जैन, अतुल जैन, बिजेंद्र जैन, सुशील जैन, आनंद जैन, पवन जैन, मनोज जैन, प्रदीप जैन, सुभाष जैन, संजीव जैन, प्रवीण जैन, विपिन जैन, अनिल जैन, सुखमाल जैन आदि उपस्थित रहे।
अजितनाथ मंदिर में पांचवें दिन छुल्लक ध्यान सागर महाराज के सानिध्य में कल्याण मंदिर विधान का आयोजन किया गया तथा उत्तम सत्य धर्म अंगीकार किया गया। विधान का शुभारंभ अजितनाथ भगवान के अभिषेक व शांतिधारा से हुआ। शांति धारा का सौभाग्य सौधर्म इंद्र नमन जैन सुपुत्र अमित जैन को प्राप्त हुआ।
कुबेर इंद्र बनने का सौभाग्य निर्मल जैन सुपुत्र विनोद जैन को प्राप्त हुआ। पंडित तरशचंद जैन द्वारा नित्य नियम के पूजन में कल्याण मंदिर विधान की पूजन कराई। नित्य नियम पूजन में देव शास्त्र, गुरु पूजन, दशलक्षण पूजन, सोहलकरण पूजन, भगवान शांतिनाथ पूजन व भगवान पार्श्वनाथ की पूजन की गई।
विधान में अशोक जैन, वरदान जैन, अनिल जैन, मधु जैन, इंद्राणी जैन, शशि जैन, कुसुम जैन और जयप्रकाश जैन आदि उपस्थित रहे।
मुनियों की कथनी और करनी में अंतर नहीं
बड़ौत। विहर्ष सभागार में आयोजित धर्मसभा में आचार्य विमर्श सागर महाराज ने कहा कि झूठ बोलकर कभी कोई सत्य को नहीं पा सकता। स्याद्वाद को अपनाकर ही सत्य हमारे पास आ सकता है। इसलिए उत्तम सत्य मुनि के पास होता है। मुनि दीक्षा लिए बिना मोक्ष नहीं मिलता।
धर्मसभा में महेंद्र जैन, विनोद जैन, वरदान जैन, राकेश जैन, प्रदीप, सुरेश, वकीलचंद, नरेशचंद, मनोज, अनिल, आदीश, सतीश, मांगेराम, मुकेश, संजय आदि उपस्थित रहे। वहीं, पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर नेहरू रोड पर भगवान श्रीजी का अभिषेक, शांतिधारा तथा नित्य नियम पूजन तथा दशलक्षण धर्म का पूजन किया।
विधानाचार्य संदीप जैन ने कहा कि श्रद्धा और भक्ति दिल से होती है। कार्यक्रम में प्रदीप कुमार जैन, देवेंद्र जैन, अशोक जैन, सुशील जैन, आनंद जैन, विनय जैन, संजय जैन, रवि जैन आदि मौजूद रहे।
सत्य मानव जीवन का श्रृंगार
बड़ौत। जैन अतिथि भवन में धर्मसभा में आर्यिका प्रत्यक्षमति माता ने कहा कि सत्य मानव जीवन का श्रृंगार है। आत्मा की सफाई होने के बाद आत्मा के दिव्य आसन में सत्य का देवता विराजमान हो जाता है। सत्य का अनुभव कहीं से भी किया आनंद की ही अनुभूति होती है।
सत्य परेशान हो सकता है पराजित नहीं
बड़ौत। अजितनाथ दिगंबर जैन प्राचीन मंदिर में विधान के मध्य मंगल प्रवचन देते हुए छुल्लक ध्यान सागर महाराज ने कहा कि आज उत्तम सत्य का दिन है। सत्य ही जीवन की परम कसौटी है। सत्य आत्मा की आत्मा है।