एक तरफ जहां केन्द्र व प्रदेश सरकार बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए शिक्षा व बाल कल्याण के लिए हर साल करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर जिम्मेदार सरकार की मंशा पर पूरी तरह से पानी फेर रहे हैं। जनपद में आज भी सैकड़ों बच्चे अपनी बदहाली पर आंसु रो रहे हैं, लेकिन संबंधित विभाग के अधिकारी केवल आंकड़ों को दुरूस्त करने में जुटे हुए हैं। उन्हें न तो सड़कों पर कूडा बीनते हुए बच्चे नजर आ रहे हैं और न ही होटल, रेस्टोरेंट या फिर चाय की दुकान पर बर्तन साफ करने वाले बच्चे।
टिमटिमाने से पहले ही बच्चों का उज्जवल भविष्य अंधेरे में डूब चुका है। रविवार को जब सार्वभौमिक बाल दिवस के अवसर पर नगर व देहात क्षेत्र में अमर उजाला टीम ने जब जरूरतमंद बच्चों की हालत की हकीकत जानने की कोशिश की, तो नौनिहालों का उज्जवल भविष्य होटलों, रेस्टोंरेट व चाय की दुकानों सहित कूड़ा बीनते समय बर्बाद होता नजर आया।
केस नंबर एक
दिल्ली-सहारनपुर हाईवे पर कांशीराम कालोनी के बाहर व बिनौली रोड पर खल मंडी के पास कूडे के ढेर में छोटे-छोटे मासूस बच्चे कूडा बीनते और कूडा उठाते नजर आया।
शिक्षा विभाग लगातार अभियान चलाकर डोर-टू-डोर जाकर जरूरतमंद बच्चों को स्कूल लाने का काम कर रहा है, यदि कुछ बच्चे छूट गए है, उन्हें भी विद्यालय का लाने का काम शिक्षा विभाग करेगा- आकांक्षा रावत बीएसए।
त्यौहार की वजह से अभियान थाम दिया गया था, अब दोबारा से दुकानों, रेस्टोरेंटों व होटलों सहित चाय की दुकानों पर अभियान चलाकर बाल मजदूरी कराने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी- विनोद कुमार श्रम प्रवर्तन अधिकारी बड़ौत।