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UP: बाल मजदूर बन नौनिहाल कर रहे परिवार का गुजारा, बचपन-भविष्य दोनों चौपट, अशिक्षा के अंधेरे से कैसे हो उजियारा

Mon, 20 Nov 2023 06:46 PM IST
Dimple Sirohi मुकेश पंवार, संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत/बड़ौत

सार

जिस उम्र में बच्चों के कंधों पर बैग और हाथ में किताब और पैंसिल होनी चाहिए उस उम्र में नौनिहालों के कंधों पर जिम्मेदारियों का बोझ है। बाल मजदूर बन ये नौनिहाल अशिक्षा के अंधेरे में अपने भविष्य की नींव रख रहे हैं। पढ़ें बागपत से ये ग्राउंड रिपोर्ट
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बाल मजदूरी - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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शिक्षा विभाग के आंकड़ो में जहां प्रत्येक जरूरतमंद बच्चा स्कूल में जाकर अक्षर का ज्ञान ले रहा है, वहीं श्रम विभाग के अनुसार भी बाल मजदूरी पूरी तरह से बंद है, लेकिन हकीकत इनसे काफी परे है। आपको यकीन नहीं होगा कि जनपद में टिमटिमाने से पहले ही नौनिहालों के जीवन में अशिक्षा का अंधेरा छाया हुआ है और शिक्षा से दूर होटलों, रेस्टारेंट व चाय की दुकानों पर काम कर उनका बचपन और भविष्य चौपट हो रहा है।

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एक तरफ जहां केन्द्र व प्रदेश सरकार बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए शिक्षा व बाल कल्याण के लिए हर साल करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर जिम्मेदार सरकार की मंशा पर पूरी तरह से पानी फेर रहे हैं। जनपद में आज भी सैकड़ों बच्चे अपनी बदहाली पर आंसु रो रहे हैं, लेकिन संबंधित विभाग के अधिकारी केवल आंकड़ों को दुरूस्त करने में जुटे हुए हैं। उन्हें न तो सड़कों पर कूडा बीनते हुए बच्चे नजर आ रहे हैं और न ही होटल, रेस्टोरेंट या फिर चाय की दुकान पर बर्तन साफ करने वाले बच्चे। 

 

टिमटिमाने से पहले ही बच्चों का उज्जवल भविष्य अंधेरे में डूब चुका है। रविवार को जब सार्वभौमिक बाल दिवस के अवसर पर नगर व देहात क्षेत्र में अमर उजाला टीम ने जब जरूरतमंद बच्चों की हालत की हकीकत जानने की कोशिश की, तो नौनिहालों का उज्जवल भविष्य होटलों, रेस्टोंरेट व चाय की दुकानों सहित कूड़ा बीनते समय बर्बाद होता नजर आया।

केस नंबर एक 
दिल्ली-सहारनपुर हाईवे पर कांशीराम कालोनी के बाहर व बिनौली रोड पर खल मंडी के पास कूडे के ढेर में छोटे-छोटे मासूस बच्चे कूडा बीनते और कूडा उठाते नजर आया।

केस नंबर दो 
बावली रोड पर एक दुकान पर छोटे-छोटे मासूम बच्चे झूठे बर्तन धोते नजर आए। वहीं एक अन्य दुकान पर छोटा बच्चा ब्रैड सेकता नजर आया। ये तो मात्र दो उदाहरण है, जनपद में जगह-जगह छोटे-छोटे रोजाना बाल मजदूरी करते नजर आते है, लेकिन अधिकारियों को ये बच्चे नजर नहीं आते।

 
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शिक्षा विभाग लगातार अभियान चलाकर डोर-टू-डोर जाकर जरूरतमंद बच्चों को स्कूल लाने का काम कर रहा है, यदि कुछ बच्चे छूट गए है, उन्हें भी विद्यालय का लाने का काम शिक्षा विभाग करेगा- आकांक्षा रावत बीएसए।

त्यौहार की वजह से अभियान थाम दिया गया था, अब दोबारा से दुकानों, रेस्टोरेंटों व होटलों सहित चाय की दुकानों पर अभियान चलाकर बाल मजदूरी कराने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी- विनोद कुमार श्रम प्रवर्तन अधिकारी बड़ौत।
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