फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Baghpat News: दस करोड़ से ज्यादा की फसल बर्बाद, दहशत में छत व सड़क पर कटी रात

Sat, 15 Jul 2023 12:26 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत
विज्ञापन
विज्ञापन
बागपत। यमुना का तटबंध टूटने से सुभानपुर, अब्दुलपुर, गढ़ी और सांकरौद गांव की करीब पांच हजार बीघा फसल डूब गई। किसानों का मानना है कि जिस तरह से पानी का तेज बहाव है और पानी दस फुट तक जमा है, उससे फसल पूरी तरह से बर्बाद हो जाएगी। इससे लगभग दस करोड़ रुपये से ज्यादा की फसल बर्बाद होने की बात कही जा रही है।
विज्ञापन

सुभानपुर और अब्दुलपुर के ग्रामीणों ने यह बयां किया कि पानी आने के बाद रात में दहशत के बीच किस तरह से उन्होंने जागकर छत और सड़क पर जागकर रात काटी है। उनका कहना है कि पानी का बहाव को देखते हुए जिस तरह से वह गांव में घुस रहा था और उनकी फसल बर्बाद हो गई है, उससे उनकी आंखों से नींद ही गायब हो गई। अब किसी तरह तटबंध को ठीक कर दिया जाए तो उसके बाद कुछ सोचा जाएगा।
गांव में ढाई हजार बीघा से ज्यादा जमीन में छह फुट से ज्यादा पानी जमा हो गया है। ऐसे में फसल को किसी भी हालत में नहीं बचाया जा सकता है और तटबंध भी ठीक नहीं हो सका। इस तरह धान, ज्वार, गन्ना व सब्जी की फसल खराब होने से पूरे गांव में करीब पांच करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान है। -गजेंद्र, प्रधान सुभानपुर
विज्ञापन

15 बीघा में धान की रोपाई कराई थी। लेकिन तटबंध टूटने से पानी के बहाव में धान उखड़ गई और खेत में कई फुट तक पानी जमा हो गया है। इस तरह काफी परेशानी बढ़ गई है। खराब फसल का मुआवजा मिलना चाहिए और भविष्य में इस तरह से नहीं हो, उसका कोई समाधान होना चाहिए। -शिवकुमार त्यागी, सुभानपुर
धान और ज्वार की फसल 13 बीघा में लगाई हुई थी। पानी के बहाव में कुछ फसल बह गई तो कुछ डूब गई। फसल के सहारे ही परिवार का गुजारा होना था। लाखों रुपये का नुकसान हुआ है और गांव में दहशत के बीच रात काटनी पड़ी। -अशोक कुमार त्यागी, सुभानपुर
दस बीघा में धान और ज्वार की फसल की बुआई की हुई थी। फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई है। अब आगे के लिए कुछ स्थिति साफ नहीं हो रही है कि परिवार का गुजारा कैसे होगा। - दिनेश कुमार, सुभानपुर
30 बीघा जमीन में धान, ज्वार, गन्ने की फसल की बुआई की हुई थी। पूरी फसल डूब गई है, जिनमें धान व ज्वार की फसल बर्बाद हो गई है। गन्ने की फसल का बाद में पता चलेगा। हमारे पूरे परिवार ने डर में मकान की छत पर जागकर रात गुजारी है। - हरीश, अब्दुलपुर
20 बीघा में ज्वार, धान, गन्ने की फसल की बुआई की हुई है। सभी फसल डूब गई है और पानी को देखते हुए फसल बर्बाद हो जाएगी। मकान की छत पर पूरी रात परिवार के सभी सदस्य बैठे रहे, क्योंकि मकान में भी पानी घुस गया था। - मोनू शर्मा, अब्दुलपुर
60 बीघा में धान की रोपाई कराई थी। लेकिन अब कई फुट तक पानी जमा हो गया है, जिसमें धान खराब हो जाएगी। फसल का नुकसान होने के साथ ही जान बचानी मुश्किल हो गई। इसलिए रिश्तेदार के यहां परिवार को लेकर चला गया था। योगेश, अब्दुलपुर
50 बीघा जमीन में धान, ज्वार, गन्ने की फसल की बुआई की हुई है। तटबंध टूटने के कारण खेतों में कई फुट तक पानी जमा हो गया है और बहाव तेज होने के कारण धान व ज्वार की फसल बर्बाद हो गई। गन्ने की फसल की स्थिति का अभी कुछ नहीं पता। पहले ही लोन लिया हुआ है, जिससे स्थिति खराब होती दिख रही है। - विपिन, गढ़ी
धान, ज्वार, गन्ने की फसल की 20 बीघा में बुआई की हुई है। अब तटबंध टूटने के कारण पूरी फसल डूब गई। पशुओं के लिए चारा तक नहीं है। लोन लिया हुआ है जो फसल बेचकर जमा कराना था, अब परेशानी बढ़ गई है। - सुनील, गढ़ी
दस बीघा जमीन में धान व ज्वार की फसल की बुआई की हुई थी। ट्रैक्टर की किस्त पहले ही जमा नहीं हो रही थी तो कर्जा लिया हुआ था। लग रहा था कि धान की फसल से कर्ज उतार देंगे, लेकिन अब फसल बर्बाद हो गई और कर्ज भी बढ़ गया। - मुनेश देवी, गढ़ी
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें