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वर्चस्व की जंग में खून से लाल हुआ खेकड़ा 

Tue, 21 Feb 2017 12:06 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
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खेकड़ा में पुष्पेंद्र की पत्नी को सांत्वना देती चेयरपर्सन नीलम धामा समेत अन्य महिलाएं। - फोटो : amar ujala
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बागपत के खेकड़ा में सत्रह साल पहले चेयरमैनी के चुनाव को लेकर मामूली कहासुनी और टोकाटाकी हुई, लेकिन सात बीतते-बीतते यहां वर्चस्व की जंग शुरू हो गई। इस खूनी खेल में अब तक पांच लोगों की हत्याएं हो चुकी है। पंचायतों के फैसले बेमायने साबित हुए। लोग सहमे हैं। पुलिस के लिए अब खूनी खेल रोकना सबसे बड़ी चुनौती है। कुछ माह बाद यहां होने वाला चुनाव पुलिस के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द साबित हो सकता है।
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वर्ष 2000 में खेकड़ा के हरेंद्र धामा और भूपेंद्र चौधरी पक्ष के बीच मामूली बात को लेकर कहासुनी हो गई थी। इसके बाद दोनों चेयरमैन पद का चुनाव लड़े, दोनों ही हार गए, लेकिन इस हार के बाद दोनों पक्षों के बीच रंजिश शुरू हुई। इससे अगले चुनाव में चेयरमैन बनें हरेंद्र धामा।  इसके बाद पहली बड़ी वारदात हुई 10 नवंबर 2009 को।  चेयरमैन हरेंद्र धामा की नगर पालिका परिसर मेें गोलियां से भूनकर हत्या की। विपक्षी भूपेंद्र चौधरी और करमवीर जेल गए थे। दूसरी हत्या आठ जुलाई 2010 को करमवीर के पिता गांधी इंटर कॉलेज के मैनेजर रामपाल चौधरी की हुई। इसमें हरेंद्र धामा पक्ष के लोगों को नामजद किया था। तीसरी वारदात हुई 18 जुलाई 2014 को। रात के करीब सात बजे खेकड़ा में ही भूपेंद्र चौधरी को 16 गोलियां मारकर मौत के घाट उतारा । इसमें चेयरपर्सन नीलम धामा समेत अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ। इन तीन हत्याओं के बाद समझौते के लिए पंचायतों का दौर शुरू हुआ। हरेंद्र धामा और भूपेंद्र चौधरी पक्ष को समझाने की कोशिशें हुई। खूब प्रयास हुए, लेकिन रविवार की रात में पांडव पुलिया पर दोहरे हत्याकांड के बाद से समझौते बिखर गए हैं। अब तक पांच लोगों का खून बह चुका है। कुछ महीने बाद ही फिर से चेयरमैन पद के लिए चुनाव है, ऐसे में यह खूनी अदावत क्या गुल खिलाएगी। पुलिस के लिए इसे रोकना सबसे बड़ी चुनौती है। लोगों के बीच भय है। फिर से खून-खराबा होने की आशंका बन गई है। पुलिस भी इस बात से अंजान नहीं है। करीब 17 साल पहले दो परिवार से शुरू हुआ झगड़ा अब खेकड़ा में कई परिवारों तक फैल चुका है। इसमें अधिकतर चेयरमैन पद के दावेदार भी बताए जा रहे हैं।
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पंचायत के समझौते पर किया भरोसा: सुरेंद्र
खेकड़ा। पोस्टमार्टम हाउस पर पहुंचे पुष्पेंद्र धामा के बड़े भाई डॉ. सुरेंद्र धामा ने कहा वर्ष 2000 में चुनाव को लेकर भूपेंद्र और अन्य लोग उनसे रंजिश रखने लगे थे। इस मामले में दो साल पहले कस्बे में समझौते के लिए बड़ी पंचायत हुई थी। इसमें आसपास के जनपदों से जिम्मेदार लोगों ने हिस्सा लिया था। सहमति बन गई थी, यहां तक की विपक्षी भूपेंद्र के परिवार ने उनके पक्ष में बयान तक दे दिए थे। हमने पंचायत के समझौते पर भरोसा कर लिया था। 

जेल नहीं भेज सके तो कर दी हत्या
खेकड़ा। डॉ. सुरेंद्र धामा ने कहा दूसरे पक्ष के लोगों ने कस्बे के ही एक युवक की भैया दूज पर्व पर पिटाई कर दी थी। इसमें उनके परिवार को नामजद कराकर जेल भेजने का प्रयास किया, लेकिन वह कामयाब नहीं हुए। इसके बाद पुष्पेंद्र की गोली मारकर हत्या कर दी।
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