गांव लुहारा में फर्जी वोटर आईडी बनाते हुए पकड़े गए चार युवकों ने पुलिस पूछताछ में कई अहम जानकारियां दी। बकौल पुलिस आरोपी पांच साल से यह गोरखधंधा कर रहे थे। 200 से 500 रुपये प्रति आईडी तैयार कर बेची जाती थी।
लुहारा गांव में मतदान स्थल के निकट मीलुद्दीन के मकान में शनिवार को पुलिस ने छापा डाल मीलुद्दीन के बेटे मीनू के अलावा अहमद पुत्र मुनीर, कर्ण सिंह के पुत्र वीर सिंह व एक नाबालिग पकड़ा था। पुलिस ने उनके कब्जे से सैकड़ों अधूरे फर्जी वोटर कार्ड बरामद किए थे।
एसओ सिंघावली अशोक यादव के अनुसार पुलिस पूछताछ के दौरान आरोपियों ने बताया कि वे पिछले पांच साल से यह काम कर रहे हैं। एक आईडी को 200 से 500 रुपए में बेचा जाता था। आरोपी आईडी के असली होने की भी पूरी गारंटी देते थे। यह आईडी खरीदने वाले इसका किस काम में प्रयोग कराते हैं इसकी आरोपियों को जानकारी नहीं है।
उनके गैंग में करीब 10-12 लोग शामिल हैं। एसओ ने बताया कि सभी की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं। पुलिस के अनुसार पांच साल से यह धंधा चल रहा था तो पुलिस को इसका पता क्यों नहीं चला? पुलिस कहां थी? क्या पुलिस का मुखबिर और सूचना तंत्र कमजोर तो नहीं हो गया? यह भी सवाल उठ रहे हैं।
फर्जी आईडी से भरे पासपोर्ट फार्म
बागपत। सीओ नरेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि आरोपियों से पूछताछ के आधार पर लुहारा गांव के युवक मुर्तजा और इमरान को हिरासत में लिया गया है। इमरान ने बताया कि वह काफी समय पूर्व पासपोर्ट के फार्म भरने का काम करता था। उसने वोटर आईडी में नाम बदलकर कई लोगों के फार्म भरे हैं। इस काम में उनके गांव का मुतर्जा भी शामिल था। फिलहाल वह दिल्ली में नौकरी करता है। सीओ का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है।