दोषियों को जेल ले जाता पुलिसकर्मी
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बिनौली गांव के युवक प्रमोद की करीब आठ साल पहले गोली मारकर की गई हत्या के मामले में कोर्ट ने आरोपी दो भाइयों को दोषी मानकर आजीवन कारावास की सजा सुनाई और 25-25 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया। तीसरा आरोपी नाबालिग था। उसका केस ज्वेनाइल कोर्ट में चल रहा है।
बिनौली निवासी प्रमोद कुमार, 19 मई 2009 को अपने घर से ट्रैक्टर लेकर गांव के कस्बा अमीनगर सराय रोड स्थित एक मिस्त्री की दुकान में गया था। वहां पर बाइक सवार लोगों ने गोली मारकर प्रमोद की हत्या की। उनके चचेरे भाई विनोद ने बिनौली थाने में आरोपी सईद और सगीर उर्फ काला पुत्र इद्दू समेत तीन लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया। आरोपी सईद और सगीर का केस अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (त्वरित) न्यायालय डॉ. मनु कालिया की कोर्ट में चल रहा था।
एडीजीसी अनुज ढाका और चश्मवीर सिंह ने बताया केस में 11 सदस्यों की कोर्ट में गवाही हुई। कोर्ट ने केस की सुनवाई करकर आरोपी सईद और सगीर को दोषी मानकर आजीवन कारावास की सजा सुनाई और 25-25 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया। यह धनराशि जमा न करने पर एक साल का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। धनराशि में से 20-20 हजार रुपये मृतक की माता को दिए जाएंगे।
लड़की को ले जाने पर हुई थी प्रमोद की हत्या
बागपत। एडीजीसी के मुताबिक आरोपी पक्ष की एक लड़की को प्रमोद बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया था। इसी रंजिश में आरोपियों ने उसकी हत्या की थी।