कचहरी हवालात पर तैनात सिपाही जितेंद्र पाल सिंह राघव ने सरकारी राइफल से शुक्रवार सुबह गोली मारकर आत्महत्या कर ली। उसकी मौके पर ही मौत हो गई। एसपी अजय शंकर राय ने घटनास्थल की जांच की। उधर, पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे परिजनों ने उनकी आत्महत्या पर सवाल उठाया। उनका कहना है रात को जितेंद्र पाल ने फोन पर बातें की थीं। खुद को पूरी तरह से ठीक बताया था। वह खुदकुशी नहीं कर सकते।
अलीगढ़ के सिकंदरपुर कोटा निवासी जितेंद्र पाल सिंह राघव (45) वर्ष 2015 से जनपद में तैनात था। फिलहाल उनकी ड्यूटी कचहरी हवालात में थी। बताया जाता है कि शुक्रवार सुबह करीब 5:40 बजे हवालात के पास गोली चलने की आवाज हुई। उनके साथ ड्यूटी पर तैनात अन्य सिपाही दौड़ कर आए तो उन्हें जितेंद्र सिंह मृत मिला। वहां पर उनकी सरकारी राइफल पड़ी थी।
सूचना मिलते ही एसपी अजय शंकर राय, एएसपी अजीजुल हक, सहायक पुलिस अधीक्षक संजीव सुमन, आरआई राजबीर सिंह मौके पर पहुंचे। आरआई राजबीर सिंह का कहना है कि जितेंद्र ने अपनी गर्दन (ठोढ़ी के नीचे) राइफल सटाकर गोली मारी जा ेखोपड़ी और हवालात के शीशे को पार करते हुए निकल गई।
इससे हवालात की दीवार और जमीन लहूलुहान हो गई। पुलिस ने कारतूस बरामद कर लिया है। साथी कांस्टेबल कृष्ण कुमार की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज की गई। घटना के वक्त एक न्यायिक अधिकारी भी हवालात के आसपास टहल रहे थे।
उधर, सूचना पर परिजन पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। उनके चचेरे भाई गवेंद्र का कहना है कि जितेंद्र पाल को कोई घरेलू टेंशन नहीं थी। वह परिवार में खुश थे। दो दिन पहले ही घर से आए थे। उनका पूरा यकीन है कि जितेंद्र सुसाइड नहीं कर सकते है।
उसकी जान कैसे और क्यो गई, इसे बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता है। कांस्टेबल जितेंद्र पाल के चार बेटी प्रीति, रचना, राधा, सरिता और तीन बेटे वैभव, चंदू और गुड्डू है। इनमें से दो बेटी शादीशुदा है। घटना से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो रहा है।
30 मिनट पहले बताया था पेट में दर्द
बागपत। आरआई राजवीर सिंह का कहना है कि घटना से करीब आधा घंटा पहले पहले जितेंद्र पाल ने अपने साथियों को पेट में दर्द बताया था। इसके बाद जिला अस्पताल के लिए गए थे। कुछ ही देर बाद वापस आ गए। जानकारी करने पर बताया था कि बगैर अस्पताल गए ही टहलने से सेहत में सुधार हो गया है।
सिपाही ने पत्नी से की थी रात दस बजे बात
बागपत। सुमन का कहना है कि उनके पति जितेंद्र पाल का गुरुवार रात दस बजे फोन आया था। बताया था कि वे अभी खाना खाकर आए थे। पूरी तरह से ठीक है। घर के बारे में जानकारी की थी। दो दिन पहले ही घर से आए थे। उनको घर की कोई टेंशन नहीं थी। विभाग में क्या चल रहा था, इसकी जानकारी नहीं है।
धरी रह गई बेटी की शादी की तमन्ना
जवां (अलीगढ़)। सिपाही जितेंद्र पाल सिंह राघव छह अप्रैल को अपने गांव सिकंदरपुर आए थे तब पत्नी सुमन और मां सोनवती से तीसरे नंबर की बेटी के ब्याह की चर्चा की थी। इसी वर्ष नवंबर माह में बेटी का विवाह करना चाह रहे थे, लेकिन नियति को कुछ और ही बदा था।
शुक्रवार सुबह 7 बजकर 45 मिनट पर एसएसपी बागपत का फोन आया तो एक झटके में पूरे परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई। पता चला कि जितेंद्र पाल सिंह अब दुनिया में नहीं रहे। उन्होंने गोली मारकर खुदकुशी कर ली है। मूलरूप से जवां थाने के सिकंदरपुर गांव निवासी जितेंद्र पाल सिंह राघव 12 अगस्त 1997 में पुलिस में भर्ती हुए थे। पिता राधेश्याम राघव भी पुलिस विभाग में हेड कांस्टेबिल थे और 45 वर्ष आयु में वर्ष 1994 में मेरठ में हृदयगति रुकने से उनकी मौत हो गई थी।
पिता की जगह ही वह भर्ती हुए थे। छोटा भाई गौतम राघव गांव में रहकर खेतीबाड़ी संभालते हैं। जितेंद्र पाल सिंह के चार बेटियां और लड़के हैं। दो बेटियों की शादी हो चुकी है। तीसरी बेटी ने इंटरमीडिएट की परीक्षा दी है। उसी शादी इस वर्ष करना चाहते थे। तीनों बेटे अभी छोटे हैं। छह अप्रैल को वह घर आए थे।
नौ अप्रैल को बागपत ड्यूटी पर लौटे थे। 13 अप्रैल को फोन पर मां और पत्नी से बात की थी, तब भी बातों में वह पूरी तरह सामान्य थे। जानकारी मिलते ही पत्नी समेत परिवार के कुछ सदस्य बागपत चले गए थे। घर पर पड़ोसियों के साथ रिश्तेदारों का जमावड़ा लग गया था।
मां सोनवती के अनुसार परिवार के सदस्यों के पहुंचने से पहले ही पुलिस ने जितेंद्र के शव का पोस्टमार्टम करा दिया था। इससे शक है कि बेटे ने खुदकुशी नहीं की, बल्कि किसी ने गोली मारी है।