बागपत में किशोरी से रेप के बाद बेटा पैदा होने के मामले में फरार चल रहे आरोपी ग्राम प्रधान ने पुलिस को चकमा देकर बृहस्पतिवार को कोर्ट में सरेंडर कर दिया। पुलिस को इसकी भनक भी नहीं लगी। आरोपी ने किशोरी के बच्चे को अपना बेटा मानने से इंकार कर दिया। उनका कहना है कि उसे चुनावी रंजिश के तहत फंसाया गया है। उसने मांग की है कि उसका व नवजात का डीएनए टेस्ट कराया जाए। ताकि सच्चाई सामने आ सके।
चांदीनगर थाना क्षेत्र के एक गांव की 16 वर्षीय किशोरी ने आरोप लगाया था कि ग्राम प्रधान उसे एक दिन बहलाकर मकान में ले गया था। आरोपी ने उसके साथ दुष्कर्म किया। धमकी दी कि किसी के सामने मुंह खोला तो अंजाम बुरा होगा। पता चलने पर परिजनों ने 15 अक्टूबर को आरोपी प्रधान के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। थाना पुलिस मामले को बेहद हल्के में ले रही थी।
शनिवार को किशोरी ने गाजियाबाद में बेटे को जन्म दिया। इस दौरान उसकी हालत बिगड़ गई थी। पुलिस ने आरोपी प्रधान की गिरफ्तारी के प्रयास शुरू कर दिए थे, लेकिन उसको गिरफ्तार नहीं कर पाई। आरोपी प्रधान के खिलाफ बुधवार को कोर्ट से गैर जमानती वारंट हो गए थे। बृहस्पतिवार को आरोपी प्रधान ने पुलिस को चकमा देकर कोर्ट में सरेंडर कर दिया। पुलिस को भनक नहीं लगी।
आरोपी ग्राम प्रधान ने जेल जाते समय कहा उसने किशोरी से दुष्कर्म नहीं किया । गांव के एक व्यक्ति ने चुनावी रंजिश में किशोरी पर दबाव बनाकर उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करवाई। उस पर लगा आरोप गलत है। उसका अौर किशोरी से पैदा हुए बच्चे का डीएनए टेस्ट कराया जाए, ताकि सच्चाई का पता चले। आरोपी ने कहा उसके चार बच्चे हैं। इस केस में पुलिस से बचने के लिए दिल्ली गया । वहां रह रहा था।