जिस तरीके से बिनौली के शाहपुर-बाणगंगा गांव के जंगल में बच्चे के साथ संदिग्ध युवक देखे गए हैं। पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी के लिए घंटों जंगल खंगाला। इससे पता चलता है कि आर्यन का अपहरण करने के बाद बदमाश उसे बागपत से बाहर लेकर नहीं गए। पुलिस को डायवर्ट करने के लिए बदमाशों ने फिरौती मेरठ और गाजियाबाद से मांगी। ताकि पुलिस दूसरे जनपदों में दौड़ती रहे।
भड़ल गांव में कांवड़ शिविर से गुरुवार दोपहर आर्यन का अपहरण करने के बाद अपहरणकर्ताओं ने 1:30 बजे उसके पिता व्यापारी रविंद्र से डेढ़ करोड़ रुपये की फिरौती मांगी थी। उसके बाद करीब सवा चार बजे दोबारा फोन कर फिरौती मांगी। पुलिस ने जांच की तो पता चला कि बदमाशों ने फिरौती मेरठ और गाजियाबाद क्षेत्र से मांगी है। पुलिस ने आसपास के जनपदों में डेरा डाल दिया। लेकिन शनिवार दोपहर बिनौली क्षेत्र के बाणगंगा गांव में संदिग्ध युवक एक बच्चे के साथ देखे गए।
पीछा करने पर आरोपी बाइक और अन्य सामान छोड़कर चले गए। इससे आशंका लगती है कि बदमाश आर्यन को लेकर बागपत में ही छुपे हुए थे। पुलिस अफसरों का ध्यान बागपत से हटाने के लिए उन्होंने मेरठ और गाजियाबाद से फिरौती मांगी। क्षेत्र के लोगों का भी कहना है कि बदमाशों ने पूरे प्लान के तहत वारदात को अंजाम दिया है।
गाजियाबाद से खरीदा था सिम
दाहा। भड़ल गांव के कांवड़ शिविर से बृहस्पतिवार को चौथी के छात्र क्रिश उर्फ आर्यन के अपहरण के मामले में पुलिस को कई अहम जानकारी मिली है। पुलिस सूत्रों की माने तो अपहरणकर्ताओं ने जिस मोबाइल नंबर से फिरौती मांगी है, वह सिम जून माह में ही गाजियाबाद से खरीदा गया था।
इससे जाहिर है कि बदमाशों ने एक माह पहले ही अपहरण और फिरौती का प्लान तैयार कर लिया था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक आर्यन का अपहरण करने के बाद अपहरणकर्ताओं ने जिस मोबाइल से फिरौती मांगी, पुलिस अफसरों ने उस नंबर को सर्विलांस पर लगाया। पता चला कि पहली धमकी मेरठ और दूसरी धमकी गाजियाबाद से दी गई।
पुलिस ने जांच की तो पता चला कि सिम को गाजियाबाद से खरीदा था। पुलिस सिम विक्रेता तक पहुंच गई। पुलिस ने सिम विक्रेता और डिस्ट्रीब्यूटर समेत तीन लोगों को गाजियाबाद से पकड़ लिया है। पूछताछ करने पर आरोपियों ने बताया कि जून माह में उनसे यह सिम खरीदा गया है। लेकिन खरीददार कौन है। इसकी उन्हें जानकारी नहीं है। पुलिस पूछताछ कर रही है।