बागपत के चांदीनगर के रटौल गांव के बुजुर्ग की बुधवार को सदमे से मौत हो गई। उनके छप्पर में डेढ़ सप्ताह पहले किसी ने आग लगा दी थी। इसमें नौ मवेशियों की झुलस जाने से मौत हो गई थी।
रटौल निवासी यासीन का तालाब के पास मकान है। मकान के बाहरी ओर छप्पर डाल रखा है। 17 मार्च की रात असामाजिक तत्वों ने छप्पर में आग लगा दी थी, जिससे उसके नौ मवेशियों की झुलस जाने से मौत हो गई थी। इससे उनको काफी आर्थिक हानि हुई थी। उन्होंने कर्ज लेकर ही मवेशियों को खरीदा था। तभी से उनके पिता निजामूद्दीन टेंशन में चल रहे थे। दो दिन पूर्व उनकी हालत बिगड़ गई थी। निजी चिकित्सकों ने उनको हायर सेंटर के लिए रेफर कर दिया था। उनका दिल्ली अस्पताल में उपचार चल रहा था। वहां पर उनकी मौत हो गई। इससे पूरे परिवार में कोहराम मचा हुआ है। परिजनों का कहना है कि आर्थिक स्थिति बिगड़ जाने से लगे सदमे से उनकी जान गई है। आरोप है कि अफसरों ने उनकी मदद करना तो दूर उनका हाल जानने की भी जरूरत नहीं समझी।
अफसरों ने नहीं की सुनवाई
चांदीनगर। आर्थिक मदद के लिए जिम्मेदार लोगों ने तहसील दिवस के अलावा दफ्तरों में भी अफसरों से शिकायत की, लेकिन किसी ने कोई सुनवाई नहीं की।