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जमीन के लिए भाई की हत्या, खेत में दबा दिया शव

Fri, 09 Mar 2018 11:57 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बिनौली
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बिनौली क्षेत्र के माल माजरा गांव में नरेशपाल का शव निकलवाते पुलिसकर्मी। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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माल माजरा गांव में लापता चल रहे किसान की हत्या कर दी गई। सात बीघा जमीन के लिए भाई ने भाई का ही खून बहा दिया। तीन साथियों के साथ मिलकर गला दबाकर हत्या करने पर शव ईंख के खेत में दबा दिया। भाई समेत दो आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने गड्ढ़ा खुदवाकर खेत से शव बरामद कर उसे पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। अन्य दो आरोपी अब तक फरार हैं।

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बता दें कि बिनौली थाना क्षेत्र के गांव माल माजरा निवासी किसान नरेश पाल (45) संदिग्ध हालात में दो माह से लापता था। सात मार्च को गांव के चौकीदार महबूब ने गुमशुदगी दर्ज कराई। शुक्रवार को पुलिस लापता किसान के बड़े भाई रमेश पाल (51) और गांव के राजीव वाल्मीकि को हिरासत में लेकर थाने पहुंची।

 

पूछताछ की गई तो सात बीघा जमीन के विवाद में हत्या की सनसनीखेज वारदात का खुलासा हुआ। पुलिस का दावा है कि दोनों ने गला दबाकर और रस्सी से नरेश पाल की हत्या की। इसके बाद शव को उसके ही खेत में दबाने की बात स्वीकारी। 
 

पुलिस दोनों आरोपियों को लेकर ईंख के खेत में पहुंची। इस दौरान सैकड़ों ग्रामीण जमा हो गए। आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने गड्ढ़ा खुदवाना शुरू किया। करीब सात फीट गहरे गड्ढ़े से नरेश का सड़ी गली अवस्था में शव बरामद हो गया। करीब दो माह पहले हत्या की यह वारदात अंजाम दी गई थी।

 

दूसरे गड्ढ़े से किसान के जूते बरामद किए गए। सीओ दिलीप सिंह, थाना प्रभारी अनुराग शर्मा ने बताया कि आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। जमीन को लेकर दोनों भाईयों के बीच विवाद था। वारदात में चार लोगों के नाम सामने आए हैं। पास के ही गांव जिवाना के दो आरोपी मनोज और हरवीर अभी फरार है।

 

पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया है। 

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उधर, एसपी जयप्रकाश का कहना है कि चौकीदार की ओर से दर्ज कराई गई गुमशुदगी को हत्या के मामले में बदल दिया गया है। रमेश पाल, राजीव, मनोज और हरबीर के खिलाफ धारा 302, 201, 364 और 34आईपीसी में मुकदमा दर्ज करा दिया गया है।

इसलिए भाई ही बना भाई की जान का दुश्मन 
बिनौली। माल माजरा गांव के किसान रणवीर सिंह के दो बेटे थे। बड़ा रमेश पाल और छोटा नरेश पाल। दोनों के हिस्से में सात-सात बीघा जमीन थी। नरेशपाल की शादी हुई। लेकिन कई साल पहले उसकी पत्नी का निधन हो गया।
 

परिवार में बच्चे नहीं थे। इस वजह से नरेश अकेला पड़ गया। ग्रामीण बताते हैं कि दो साल पहले नरेश ने अपने हिस्से की जमीन बेचने का प्रयास किया था। मगर रमेश पाल ने किसी तरह मामला संभाल लिया। परिवार की पंचायत ने फैसला किया कि नरेश की जमीन को ठेके पर रमेश रखेगा और इसके रुपये उसे मिलते रहेंगे। ऐसा ही किया भी गया। पिछले दिनों नरेश ने अपनी जमीन को खुद बोने की बात कहकर वापस ले लिया। यहीं पर दोनों भाईयों के बीच तकरार बढ़ी और मामला हत्या तक पहुंच गया। ब्यूरो

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