किसान नरेश पाल की हत्या सिर्फ राज बनकर ही रह जाती। लेकिन पुलिस को मिली एक गुप्त चिट्ठी ने खूनी साजिश और सनसनीखेज वारदात से पर्दा हटा दिया। पुलिस ने पत्र को गंभीरता से लिया और मुखबिरों का जाल बिछाया। आरोपियों की कुंडली खंगाली गई। वारदात के तार जुड़े तो दो आरोपियों को हिरासत में लिया। इसके बाद साजिश खुलती चली गई।
माल माजरा गांव का किसान नरेश पाल दो माह से लापता था। गांव में चर्चा जरूर थी, लेकिन चौंकाने वाली बात यह रही कि परिवार के लोग थाने तक नहीं पहुंचे। ग्रामीणों ने समझा दोनों भाईयों के बीच लंबे समय से मनमुटाव है, यही वजह रही होगी।
इसी बीच, कुछ दिन पहले ही बिनौली पुलिस को एक चिट्ठी मिली। सादे कागज पर लिखी यह चिट्ठी थाने में खोली गई तो किसी शख्स ने नाम गुप्त रखते हुए किसान के लापता होने से लेकर उसकी हत्या तक के बारे में लिखा था। इसके बाद आरोपियों की सीधे गिरफ्तारी के बजाय पुलिस ने पहले सधी हुई चाल चली। आरोपियों की गतिविधियां और कुंडली खंगाली गई।
मुखबिरों ने काम किया। चिट्ठी में लिखी बातों से गांव की चर्चाओं का मेल मिला तो पुलिस हरकत में आ गई। आरोपी भाई समेत दो को हिरासत में लेकर पूछताछ में केस का खुलासा हुआ। फिर दोनों की निशानदेही पर सैकड़ों ग्रामीणों के बीच जमीन खुदवाकर शव बरामद किया गया।
माना जा रहा है कि जमीन को लेकर चल रहे विवाद के बीच ही लापता किसान के बारे में परिवार या मोहल्ले के ही किसी शख्स ने गोपनीय चिट्ठी के माध्यम से पुलिस को जानकारी दी है। हालांकि पुलिस की ओर से अभी चिट्ठी से जुड़े शख्स का कोई खुलासा नहीं किया गया है। पुलिस का कहना है कि प्रकरण की जांच अभी जारी है।
दो लाख रुपये में अंजाम दी गई वारदात
बिनौली। पुलिस के मुताबिक रमेश पाल के खेत में गांव का ही राजीव वाल्मीकि और जिवाना गांव का मनोज और हरबीर गन्ना छिलाई का काम करते थे। पुलिस और ग्रामीणों के मानें तो रमेश पाल ने इन तीनों को हत्या का ठेका दो लाख रुपये में दे दिया।
वारदात के दिन नरेश पाल खेत में पहुंचा। गन्ना छिलाई के दौरान वह इन तीनों लोगों के पास पहुंच गया। तीनों ने एकाएक उसे दबोच लिया और गला दबाकर हत्या कर दी। शव को पत्तियों में छिपा दिया गया। फिर तीनों ने मिलकर गड्ढ़ा खोदा और रस्सी के सहारे उसे गड्ढ़े में दबा दिया गया। बाद में रमेश पाल को सूचना दी गई। ब्यूरो