आरोप लगाया कि उस दौरान ही उसकी बेटी को गोली मारकर घायल कर दिया गया। जिसके बाद जातिसूचक शब्दों से गालियां और जान से मारने की धमकी देकर दोनों आरोपी भाग गए। घायल बेटी का जिला अस्पताल में उपचार कराया गया, जहां से मेरठ रेफर कर दिया गया। पुलिस ने कपिल और उसके साथी नीरज को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया और न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल कर दिया। मुकदमे की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश एससी-एसटी विशेष में हुई।
वहीं, सुनवाई पूरी होने पर न्यायाधीश विजय राजे सिसौदिया ने कपिल को कठोर आजीवन कारावास और नीरज को दस साल की सजा सुनाई। साथ ही 28-28 हजार रुपये अर्थदंड लगाया। जिसे अदा नहीं करने पर कपिल की एक साल और नीरज की छह माह की सजा बढ़ाने के आदेश दिए।