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इतने झोल, कहीं बाइज्जत बरी न हो जाए राठी

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बागपत। पूर्वांचल के डॉन मुन्ना बजरंगी की हत्या में इतने पेंच हैं कि आरोपी बनाया गया सुनील राठी के खिलाफ पुलिस के पास वारदात का एक भी प्रत्यक्षदर्शी नहीं है। खुद जेलर ने भी सिर्फ गोलियों की आवाज सुनी है। राठी के खिलाफ गवाही देने की हिम्मत किसी बंदी में नहीं है। यही वजह है कि लापरवाही में अफसरों पर तो कार्रवाई होनी शुरू हो गई है, लेकिन सुनील राठी को सजा कराना आसान नहीं होगा।
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बागपत जेल में सोमवार सुबह सवा छह बजे मुन्ना बजरंगी की हत्या हुई। जेलर ने मुकदमे में लिखवाया है कि एकल कक्ष में सुनील राठी ने बजरंगी की गोली मारकर हत्या कर दी है, जबकि हत्या तन्हाई बैरक के बाहर हुई है। इस वारदात का प्रत्यक्षदर्शी मिलना आसान नहीं होगा। कोई बंदी या जेल कर्मी आसानी से गवाही नहीं देगा। बजरंगी जिस विक्की सुन्हैड़ा के साथ बैरक में रुका था, वह खुद कह चुका है कि उसने तो शौचालय के अंदर से गोली चलने की आवाज सुनी । उसे नहीं पता गोली किसने चलाई। राठी ने पुलिस के सामने हत्या की बात स्वीकार कर ली है, लेकिन उसका कहना है कि पिस्टल मुन्ना बजरंगी की थी। इसमें पेंच यह है कि वारदात के बाद पिस्टल को गटर में फेंक दिया। करीब 12 घंटे बाद पिस्टल निकला, जिस पर फिंगर प्रिंट मिलना आसान काम नहीं है। पुलिस के सामने भले ही राठी ने वारदात कुबूल कर ली हो, लेकिन कानूनी लड़ाई में वह कभी इसे स्वीकार नहीं करेगा। जेल में पिस्टल जिस भी तरह पहुंची हो, इसमें अफसरों पर ही कार्रवाई होनी है। पुलिस के लिए घटना के तार जोड़ना आसान काम नहीं है।
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