बड़ौत/अमीनगर सराय (बागपत)। पुलवामा में सिलाई कारीगरों पर पत्थर फेंकने का दबाव बनाने के मामले में खुफिया विभाग और पुलिस अलर्ट रही। मेरठ से पहुंची क्राइम ब्रांच की टीम ने बड़ौत कोतवाली में नसीम से कई घंटे तक पूछताछ कर जानकारी जुटाई। उधर, डौलचा गांव का शमीम अपने घर पर नहीं मिला। परिजनों का कहना है कि उन्हें शमीम के विषय में जानकारी नहीं है।
बड़ौत निवासी नसीम पुत्र रोजूदीन, बालैनी थाना क्षेत्र के डौलचा गांव निवासी शमीम और सहारनपुर के युवक जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के लस्सीपुरा स्थित सिलाई फैक्ट्री में बतौर कारीगर काम करने के लिए गए थे। ईद से पहले वहां से लौटे इन कारीगरों का कहना था कि उन पर पत्थर फेंकने के लिए दबाव बनाया गया था। मीडिया के सामने भी बड़ौत के नसीम ने यह बात स्वीकार की कि उन पर दबाव बनाया था। पुलिस तक मामला पहुंचा तो अधिकारी हरकत में आ गए। बृहस्पतिवार को मेरठ क्राइम ब्रांच की टीम ने बड़ौत कोतवाली में नसीम से पूछताछ की। स्थानीय पुलिस ने भी जानकारी ली। काफी देर तक पूछताछ की गई है। एसपी जयप्रकाश का कहना है कि नसीम से जानकारी ली गई है, लेकिन वह पत्थरबाजी के लिए दबाव बनाने की बात से मना कर रहा है। इसके बाद भी जांच चल रही है। उधर, खुफिया विभाग की टीम भी मामले की पड़ताल में जुटी हुई है। डौलचा गांव के शमीम की पुलिस ने जानकारी जुटाई, लेकिन वह अपने घर पर नहीं मिला। परिजनों ने कहा कि उन्हें शमीम के विषय में कोई जानकारी नहीं है।
बागपत से गए थे तीन युवक
बड़ौत। सिलाई के लिए बड़ौत का नसीम, ढिकाना का अंकित और डौलचा का शमीम पुलवामा गए थे। नसीम का परिवार भी साथ था। पुलिस इन्हें फैक्ट्री ले जाने वाले युवकों की तलाश में जुटी है।
फैक्ट्री मालिक कर रहा कॉल
बड़ौत। बड़ौत का नसीम अपने बयान से पलट गया है। उसका कहना है कि उन्हें डर था कि फैक्ट्री मालिक उन पर मुकदमा दर्ज करा सकता है, इस वजह से उन्होंने पत्थरबाजी की बात जोड़ दी थी। नसीम ने कहा अब भी फैक्ट्री मालिक उन्हें कॉल कर धमकी दे रहा है।