बागपत। हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल है कि यमुना में नाव किसके इशारे पर चल रही थी। जिला पंचायत ने कहा कि पिछले साल 31 मार्च के बाद ठेका नहीं छोड़ा गया। इससे जाहिर है कि अवैध तरीके से नाव चलाई जा रही थी। हरियाणा से शराब और पशु की तस्करी भी नाव के जरिए होती है। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि सिस्टम की मिलीभगत से ही यह नाव चल रही थी।
काठा गांव का रकबा यमुना नदी के दोनों किनारों पर है। रोज सुबह बड़ी संख्या में किसान और मजदूर यमुना के पार खेतों में जाते हैं। आवागमन का बड़ा सहारा है नाव। हादसे की गूंज लखनऊ और दिल्ली तक हुई तो वजह भी तलाशी जाने लगी है। ग्रामीणों ने सरेआम जिला पंचायत पर आरोप लगाया। भाजपा विधायक योगेश धामा की पत्नी रेणू धामा जिला पंचायत अध्यक्ष हैं। ठेका किसने छोड़ा, लेकिन जिला पंचायत मुकर गई है। जिला पंचायत का कहना है कि 31 मार्च 2016 के बाद उन्होंने कोई ठेका नहीं छोड़ा। शासन ने रोक लगा दी थी। अब सवाल है कि फिर नाव किसके इशारे पर चल रही थी। ग्रामीणों ने भाजपा विधायक योगेश धामा और जिला पंचायत पर पर आरोप लगाया। आखिर किसके इशारे पर यह मौत की नाव चल रही थी। डीएम भवानी सिंह खंगारौत ने कहा कि इसकी जांच कराई जा रही है।
नाव के जरिए शराब और पशु तस्करी
बागपत। काठा में चल रही नाव सुबह-शाम तो किसान और मजदूरों को लाती थी, लेकिन दिन में इससे शराब की तस्करी होती थी। ग्रामीणों ने केंद्रीय मानव संसाधन एवं नदी विकास मंत्री डॉ. सत्यपाल सिंह के सामने कहा कि दिनभर नाव से शराब तस्करी होती थी। इसके अलावा हरियाणा के गांवों से पशु लाए और ले जाए जाते थे। नाव चलाने वाले की मुख्य आमदनी का स्रोत तस्करी का यही खेल है। वाहनों को भी नाव के जरिए लाया और ले जाया जाता था।