बागपत। लुहारी गांव के दलित युवक अजेंद्र पाल की मौत के राज से पांच साल बाद पर्दा उठा। पुलिस का दावा है कि उसकी सड़क हादसे में मौत नहीं हुई। दोस्त ने ही बीमा के 40 लाख रुपये हड़पने के लिए उसकी हत्या की है। मृतक की पत्नी इंसाफ के लिए हाईकोर्ट पहुंची थी।
बड़ौत क्षेत्र के लुहारी गांव के युवक अजेंद्र पाल की वर्ष 2012 में अमीनगर सराय-बिनौली मार्ग पर कैड़वा गांव के पास मौत हुई । उसके गांव के ही साथी जितेंद्र ने सड़क हादसे में मौत होना बताकर अज्ञात में सिंघावली अहीर थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। उसने बताया था कि वह अपने साथी अजेंद्र पाल के साथ अलग-अलग बाइक पर सवार होकर मेरठ से अपने घर जा रहा था। रास्ते में अज्ञात वाहन ने उसको कुचल दिया। पुलिस हादसा ही मान रही थी। सिंघावली अहीर पुलिस ने हादसे के आरोप में ही कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की ।
उधर मृतक अजेंद्र पाल की पत्नी ब्रिजेश का मानना था कि उसके पति की हादसे में मौत नहीं हुई है। उसकी जितेंद्र ने ही हत्या की है। उसने पुन: विवेचना के लिए हाईकोर्ट में अर्जी लगाई । हाईकोर्ट के आदेश पर केस की विवेचना सिंघावली अहीर थाने से बागपत कोतवाली ट्रांसफर हो गई । पुलिस मामले की जांच में लगी । कोतवाली एसएसआई धर्मेंद्र सिंह संधु ने कहा पुलिस की विवेचना में सामने आया है कि जितेंद्र की अपने साथी अजेंद्र पाल के बीमा की करीब 40 लाख रुपये की रकम पर नजर थी। उसको हड़पने के लिए उसने अजेंद्र पाल की हत्या की । खुद को बचाने के लिए उसने हादसे का रूप दिया । आरोपी जितेंद्र को गिरफ्तार किया। उधर आरोपी जितेंद्र का कहना है कि उसको सरकारी गल्ले की दुकान के विवाद में साजिश के तहत फंसाया गया है। अजेंद्र पाल की हादसे में ही जान गई है। उस पर हत्या का आरोप पूरी तरह से गलत है।