छपरौली (बागपत)।
लूंब गांव के सुधीर की हत्या के मामले में पुलिस हत्यारोपियों को नहीं पकड़ पाई। अभी तक सुधीर का शव भी बरामद नहीं हुआ। पुलिस ने दूसरे दिन भी डॉग स्क्वॉयड टीम के साथ जंगल में कांबिंग की, लेकिन कोई सफलता नहीं मिला। आरोपियों के न पकड़े जाने से पीड़ित परिवार में दहशत फैली हुई है। मृतक के परिजन एसपी से मिले और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की। उन्होंने कहा कि हत्यारोपी भाई उनकी भी हत्या कर सकता है। वह जंगल में ही छिपा हुआ है।
लूंब गांव के सुधीर की हत्या के मामले में चार दिन बाद भी पुलिस को कोई सफलता नहीं मिली है। पुलिस न तो सुधीर का शव बरामद कर सकी है और न ही आरोपियों को पकड़ पाई। पीड़ित परिवार डर के मारे घर में कैद होकर रह गया है। पुलिस हत्यारोपी भाई की तलाश में दिन-रात लगी है। शनिवार को पुलिस ने डॉग स्क्वॉयड टीम के साथ लूंब और आसपास के गांवों के जंगल में कांबिंग की, लेकिन कुछ हाथ नहीं लग सका। पुलिस और एसओजी की टीमें दबिशें दे रही है। सर्विलांस की भी मदद ली जा रही है। आरोपियों के न पकड़े जाने से पीड़ित परिवार में दहशत फैली हुई है।
परिजनों को आशंका है वे उनकी भी हत्या कर सकते हैं। शनिवार को मृतक की पत्नी पूजा, भाई राजीव, बहन बबीता, भाभी सुनीता और मनु एसपी जयप्रकाश से मिले। पत्नी पूजा ने एसपी को बताया बुधवार को जेठ प्रदीप, उसके बेटे सचिन, अंकुर एवं शामली जनपद के एलम निवासी राजीव ने पति सुधीर पर गोलियां से भूनकर उसकी आंखों के सामने सुधीर की हत्या कर दी थी। उसने किसी तरह वहां से भागकर जान बचाई। हत्यारोपी पति को शव को 10 मीटर तक घसीटते हुए कार के पास ले गए और डिग्गी में डालकर भाग निकले थे। हत्यारोपियों को शीघ्र गिरफ्तार किया जाए। वे शातिर किस्म के अपराधी है और उनकी भी हत्या कर सकते हैं। जेठ प्रदीप ने 14 नवंबर को अपने पिता गणेशी की भी हत्या कर दी थी। एसपी जयप्रकाश ने उन्हें आश्वासन दिया जल्द ही आरोपियों को पकड़ लिया जाएगा। डरने की जरूरत नहीं है। पुलिस सुरक्षा प्रदान की गई है।
ऐलान करके की गई थी सुधीर की हत्या
बागपत। लूंब गांव के सुधीर की हत्या ऐलान करके की गई है। मृतक के छोटे भाई संजीव की पत्नी मनु ने बताया कि 30 मई की सुबह हत्यारोपी प्रदीप, उसके दोनों बेटों, साथी राजीव ने हथियार लेकर दोनों भाइयों का घर तक पीछा किया। घर में घुसकर उनकी पिटाई की। जान बचाने के लिए दोनों भाइयों ने छपरौली थाने में शरण ली। आरोपी थाने में भी पहुंच गए। पुलिस के सामने सुधीर और संजीव की पिटाई की। थाने में ही ऐलान किया कि शाम होने से पहले ही दोनों को जान से मार दूंगा। इतना होने के बाद भी पुलिस ने सचिन, अंकुर और राजीव को थाने से ही छोड़ दिया और प्रदीप का शांति भंग के आरोप में चालान कर दिया। बड़ौत तहसील से जमानत मिलते ही प्रदीप ने अपने दोनों बेटों और दोस्त के साथ मिलकर सुधीर की हत्या की। उसकी हत्या की जिम्मेदार पुलिस है। पुलिस यदि आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करती तो उसकी जान बच सकती थी। पुलिस की लापरवाही के कारण ही सुधीर की हत्या हुई है।
भाइयों के हिस्से की जमीन हड़पना चाहता है प्रदीप
बागपत। मृतक सुधीर चार भाई हैं। सबसे बड़ा प्रदीप है। जिस पर भाई की हत्या का आरोप है। उससे छोटा सुधीर है। इससे छोटा संजीव और सबसे छोटा राजीव है। संजीव आर्मी में है और हाल में मेरठ में तैनात है। राजीव आईटीबीपी का जवान है। वह इलाहाबाद में तैनात है। सुधीर, संजीव और राजीव एक जगह रहते हैं। प्रदीप अलग रहता है। तीन भाइयों के हिस्से की जमीन सुधीर के पास है। प्रदीप ने अपने हिस्से की ढाई बीघा जमीन पहले ही बेच दी है। अब अपने भाइयों के हिस्से की जमीन पर उसकी नजर है। मां के हिस्से में आई ढाई बीघा जमीन को अपने बेटों के नाम करा ली। इसे लेकर तीनों भाइयों से प्रदीप का झगड़ा चल रहा है। भाई राजीव ने बताया कि वह उनकी भी हत्या कर देगा।
मां जानती है, प्रदीप कहां है
बागपत। मृतक सुधीर की पत्नी ने बताया कि हत्यारोपी जेठ कहां पर छिपा हुआ है, उसकी मां को पता है। वह उससे मोबाइल पर भी बात करती है और उसके लिए खाना लेकर भी जाती है। सुबह घर से चली जाती है और शाम को वापस आती है। पुलिस उसे उठाकर पूछताछ करे तो वह प्रदीप के ठिकाने के बारे में सब कुछ बता देगी।