बेगुनाह अजीम को शाही पुलिस ने ऐसे अपराध के लिए पांच दिन से थाने में बैठा रखा है जो उसने किया ही नहीं। उसका कसूर बस इतना है कि उसके एक हमनाम ने दो साथियों के साथ छठवीं में पढ़ने वाली छात्रा से सप्ताह भर पहले दुष्कर्म किया था। इसकी एफआईआर दर्ज हुई तो दुष्कर्मियों को बचाने के लिए उनके दबंग हिमायतियों ने अजीम का पीड़िता से जबरन निकाह पढ़वा दिया। दबंगों से साठगांठ के चलते पुलिस ने अगले ही दिन अजीम को उठा लिया ताकि वह इस ज्यादती की कहीं शिकायत भी न कर सके।
शाही के एक गांव की 14 वर्षीय किशोरी के साथ 25 मई को गांव के ही तीन लड़कों ने दुष्कर्म किया था। पीड़िता के मुताबिक वह गांव में ही कपड़ों पर प्रेस कराने जा रही थी तभी बाइक पर आए शाने आलम पुत्र नौशे खां, शोएब उर्फ अजीम हामिद अली और इमरान पुत्र भूरे खां उसे अगवा कर ले गए। नदी पार खादर में ले जाकर तीनों ने उसके साथ दुष्कर्म किया। विरोध करने पर उसे तमंचा दिखाकर धमकाया और मुंह में कपड़ा ठूंस दिया। घर लौटकर उसने आपबीती बताई तो उसकी मां ने थाना शाही में तीनों आरोपियों के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत सामूहिक दुष्कर्म, मारपीट और जान से मारने की धमकी देने की रिपोर्ट दर्ज कराई।
पीड़िता के परिवार का कहना है कि आरोपी प्रधान आरिफ के लोग थे। आरोपियों को बचाने के लिए प्रधान समेत उनके दबंग हिमायतियों ने ट्रक क्लीनर अजीम पुत्र महमूद शाह को फोन पर यह कहकर कटरा (शाहजहांपुर) से बुलाया कि उसका नाम गैंगरेप में आ रहा है। उसके आने के बाद उसी रात पीड़िता के घर धावा बोलकर जबरन दोनों का निकाह करा दिया। इसके बाद पीड़िता को अजीम के घर पर ही रखा गया। 28 मई को अजीम को शाही पुलिस पकड़कर थाने ले आई। तबसे वह पुलिस की अवैध हिरासत में है।