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कचहरी में पुलिस सुरक्षा के नहीं पुख्ता इंतजाम

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बागपत। पुलिस कस्टडी से बंदियों के भागने के बाद भी पुलिस सबक नहीं ले रही है। कचहरी में सुरक्षा व्यवस्था के कोई इंतजाम नहीं है। कचहरी में बने प्रवेश द्वार पर लगी मेटल डिटेक्टर मशीन शोपीस बन कर रही गई है। कचहरी हवालात से बंदियों को पेशी पर ले जाते समय पुलिस कर्मी लापरवाही बरतते हैं। कचहरी में कोई भी बंदी आराम से फरार हो सकता है।
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कचहरी एंट्री के लिए तीन द्वार है। तीसरे द्वार से बंदियों को लाया जाता है। यहां सुरक्षा के व्यापक इंतजाम नहीं है। प्रवेश द्वार पर लगी मेटल डिटेक्टर मशीन शोपीस बनी हुई है। हवालात से बंदियों को पेशी पर ले जाते समय पुलिस कर्मी लापरवाही बरते है। बंदियों को लोगों से बात करने की खुली छूट देते है। जिसका फायदा बंदी उठा लेते है। इसी तरह से 27 जून को कुख्यात जावेद रटौल भी कचहरी से भाग गया था, लेकिन पुलिस ने इसके बाद भी सबक नहीं लिया। कचहरी की दीवारें भी बहुत छोटी है। उनको बंदी आसानी से फांद सकता है। लोग कचहरी परिसर में अक्सर असलहा लेकर घूमते नजर आते है। असलहाधारी को रोकने के लिए कोई भी पुलिस कर्मी जहमत नहीं उठाता है। एसपी शैलेश कुमार पांडेय ने बताया कि कचहरी में सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त है। प्रवेश द्वारा पर सघन चेकिंग के बाद ही लोगों को अंदर जाने दिया जाता है। यदि कोई पुलिस कर्मी ड्यूटी में लापरवाही करता है तो जांच कराकर उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

हवालात में आए दिन होती है बंदियों में मारपीट
बागपत। कचहरी परिसर में बनी हवालात क्षमता से अधिक बंदी बंद किए जाते है। इन बंदियों के परिजन सुरक्षा में लगे पुलिस कर्मियों से साठगांठ करके उन्हें पान, पुड़िया, सिगरेट, बीड़ी समेत अन्य सामान आसानी से पहुंचा देते है। हवालात के आसपास लोगों का जमघट लगा रहता है। बंदियों से आने से जाने तक परिजन मिलने की फिराक में रहते हैं। हवालात में जगह कम होने की वजह से अक्सर बंदियों में मारपीट होती है। इसमें कई बंदी जख्मी हो चुके है।
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घटना के कुछ दिन तक ही रहती है पुलिस सक्रिय
बागपत। कचहरी परिसर में कोई घटना हो जाए तो पुलिस कुछ दिन तक पुलिस सक्रिय रहती है, लेकिन इसके बाद फिर सुरक्षा व्यवस्था अपने ढर्रे पर आ जाती है। प्रदेश में कहीं किसी कचल्हरी में कोई वारदात हो जाए तो पुलिस के अधिकारी कचहरी की सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेते हैं। बाद में फिर से पुराना हाल हो जाता है।
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