साल 2008 में दो लोगों की हर दी गई थी हत्या
बागपत। खनन के खेल में खून-खराबा पहले भी होता रहा है। साल 2008 में यमुना खादर में दो लोगों की हत्या कर दी गई थी। फायरिंग, आगजनी और पुलिस को विरोध पहले भी हो चुका है। अब फिर यमुना खादर में खनन को लेकर खूनी संघर्ष हुआ। रास्ता बनाने के लिए ठेकेदार पक्ष के लोग पहुंचे। छपरौली से लेकर खेकड़ा तक खूनी संघर्ष कई बार हो चुका है। साल 2007 में नैथला गांव में ठेकेदार और ग्रामीणों के बीच फायरिंग हुई थी, जिसमें दर्जनभर से अधिक ग्रामीण घायल हो गए थे। साल 2008 में बागपत के यमुना खादर में दो लोगों की हत्या कर दी गई थी। साल 2012 में सिसाना के यमुना खादर में खनन ठेकेदारों पर लूटपाट का आरोप लगा। साल 2014 में भी खून-खराबा हुआ। पिछले वर्ष नैथला में खनन माफिया ने दो युवकों को अधमरा कर दिया था।
पांच जगह खनन की मिली है स्वीकृति
बागपत। खनन के पट्टों पर जिले में पांच जगह स्वीकृति मिली हैं। ई-टेडरिंग की प्रक्रिया के बाद इनमें सुभानपुर, छपरौली और गौरीपुर में खनन की अनमति दे दी गई थी। इसके अलावा बदरखा और सांकरौद में भी अभी प्रक्रिया चल रही है। अनमुति मिलने के बाद ही ठेकेदार के लोग यहां रास्ता बनाने पहुंचे थे।