नियुक्ति, ट्रांसफर और विस्तारीकरण में करोड़ों की हेराफेरी
- बागपत की रमाला मिल से लखनऊ तक शिकायतों का अंबार
- रमाला सहकारी मिल के पूर्व संचालक ने की थी बीके यादव की शिकायत
फोटो संख्या-13
अमर उजाला ब्यूरो
बागपत। सहकारी चीनी मिल संघ के पूर्व प्रबंध निदेशक डॉ बीके यादव की बागपत जिले से भी कई शिकायतें की गई थी। रमाला मिल के प्रकरण के अलावा यादव पर हेराफेरी का आरोप लगाते हुए रमाला सहकारी चीनी मिल के पूर्व संचालक सत्यवीर सिंह ने मुख्यमंत्री से शिकायत की थी। यादव पर नियुक्ति, ट्रांसफर और विस्तारीकरण के नाम पर करोड़ों रुपये के गोलमाल का आरोप लगाया गया था। इसकी जांच लखनऊ मंडलायुक्त ने की।
प्रबंधक निदेशक रहे डॉ बीके यादव का कार्यकाल 18 दिसंबर 2013 से 23 मई 2017 तक रहा। गन्ना आयुक्त ने उनकी सीबीआई जांच की संस्तुति कर दी है। जिस वक्त यादव प्रबंध निदेशक रहे, उस चार साल के अंतराल में रमाला चीनी मिल में गड़बड़ी की कई शिकायतें की गई। भगवानपुर नांगल के पूर्व डायरेक्टर रामपाल सिंह, भाकियू के प्रदेश उपाध्यक्ष राजेंद्र सिंह तोमर, पूर्व संचालक सत्यवीर सिंह ने इसी अप्रैल में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से प्रकरण की शिकायत की थी। पूर्व संचालक ने आरोप लगाया था कि जनरल मैनेजर, मुख्य लेखाकार, मुख्य अभियंता, मुख्य रसायनविद, मुख्य गन्ना अधिकारी, सिविल इंजीनियर, कैमिस्ट, इंजीनियर के पदों से करोड़ों रुपये प्रतिवर्ष लिए जाते हैं। उनके कार्यकाल में आठ सौ नियुक्तियां कराई गई जिसमें 25 करोड़ रुपये के लेन-देन का आरोप लगाया। सीजन में कर्मचारियों को स्थानांतरण के नाम से डराकर भी वसूली की गई। ये शिकायतें भाजपा सरकार बनने के बाद गन्ना राज्यमंत्री और सीएम योगी आदित्यनाथ से की गई थी। इनके बाद जांच शुरू हुई।
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विस्तारीकरण के नाम पर करोड़ों का गोलमाल
बागपत। शिकायत में डॉ बीके यादव पर आरोप लगाया गया था कि चीनी मिलों के विस्तारीकरण, मोडिफिकेश और बजट के नाम पर करीब 30 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष की हेराफेरी की जाती थी। चीनी मिलों के लिए सामान खरीदने जैसे खाली बोरिया, बियरिंग, चूना, वेल्डिंग, रॉड आदि में करीब दस करोड़ रुपये की हेराफेरी की शिकायत की गई थी।
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पांच साल में चार सौ करोड़ का आरोप
बागपत। सहकारी चीनी मिल रमाला के पूर्व संचालक सत्यवीर सिंह ने आरोप लगाया था कि डॉ बीके यादव ने पांच साल में करीब चार सौ करोड़ रुपये की हेराफेरी की है, उन्होंने प्रकरण की सीबीआई जांच की मांग की। शिकायत में कहा गया था कि सपा की सरकार बनने के बाद उन्हें केंद्र से प्रतिनियुक्ति पर लाया गया। सहकारी चीनी मिलों में भी रखा गया। सपा के संरक्षक मुलायम सिंह यादव जब यूपी के मुख्यमंत्री थी, जब वह बिजनौर की नजीबाबाद चीनी मिल में प्रधान प्रबंधक थे। सीएम अखिलेश यादव ने उन्हें प्रबंधक निदेशक बनाया। वर्ष 2014-15 के मेडिकल बिलों की जांच की मांग की गई थी।
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सीबीआई जांच से सामने आएगा सच
भगवानपुर नांगल के पूर्व डायरेक्टर रामपाल सिंह, पूर्व संचालक धीर सिंह, पूर्व संचालक सतबीर सिंह और भाकियू नेता राजेंद्र सिंह का कहना है कि निष्पक्ष जांच के बाद दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा। सीबीआई की जांच से रमाला चीनी मिल में हुए गबन की परतें खुलेंगी।
इनसेट
यादव के साथ कौन?
प्रबंध निदेशक के अलावा सीबीआई की जांच के रडार पर अन्य कई अधिकारी भी आएंगे। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि उनके नाम भी जांच के दौरान बताए जाएंगे, ताकि रमाला से लखनऊ तक हुई गड़बड़ी की सही परतें खुल सकें।