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गोताखोरों के हौंसले को इनाम

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बागपत। एनडीआरएफ के पहुंचने से पहले डूबी गई नाव में 11 सवारियों को सकुशल निकालने वाले गोताखोरों के हौसले की हर कोई प्रशंसा कर रहा है। पुलिस ने उनको 15 हजार रुपये का नगद इनाम दिया। गोताखोर इरफान को आंखों से बेहद ही कम दिखाई देता है। उसने अपनी टीम के साथ मिलकर काठा में लोगों को बचाया।
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काठा गांव में नाव के यमुना में समाने का पता चलते ही गोताखोर इरफान अपने तीन साथी शरीफ, नौशाद और इमरान के साथ यमुना घाट पर पहुंच गया था। उन्होंने एक-एक करके 11 महिला-पुरूषों को सकुशल यमुना नदी से बाहर निकाला। यमुना नदी में डूबने से 19 सवारियों की मौत हो गई । गोताखोरों ने सभी शवों को बाहर निकाला। इसके बाद ही एनडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंचे। टीम ने दो दिन तक सर्च अभियान चलाया, लेकिन कोई डूबा हुआ नहीं मिला । गोताखोरों के हौसले की हर कोई प्रशंसा कर रहा है। इरफान को आंखों से बेहद कम दिखाता है। उसने बताया वह अपने साथियों के साथ पिछले करीब 15 वर्षों से इस कार्य को कर रहा है। उसने काफी लोगों की जान बचाई है। उत्तराखंड की केदारनाथ त्रासदी में भी प्रशासन द्वारा वहां पर भेजा गया था। उसने 32 श्रद्धालुओं की जान बचाई थी। कोतवाली प्रभारी दिनेश कुमार का कहना है कि गोताखोरों को 15 हजार रुपये बतौर इनाम दिए हैं।

राहुल के लिए रवि का डंडा बना खेवनहार
बागपत। काठा गांव के राहुल ने बताया वह अपने चाचा तेजपाल के साथ नाव में सवार होकर खादर में खेत में जा रहा था। नाव पानी में डूब गई थी। वह चाचा के साथ यमुना से निकलने लगा, लेकिन चाचा की डूबने से मौत हो गई। वह भी डूब जाता, गांव के ही रवि ने उसकी डंडे से मद्द की। इसी कारण यमुना से निकलने में कामयाब हो पाया था।
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