बागपत। मुख्य चिकित्साधिकारी दफ्तर में मानसिक रोगी ने तोड़फोड़ कर दी। इससे दफ्तर में भगदड़ मच गई। दफ्तर में मौजूद कुछ लोगों और कर्मचारियों ने उसे काबू में किया। इसकी सूचना पुलिस को दी। आरोप है बिना जांच कराए ही आरोपी अपना दिव्यांग प्रमाणपत्र बनवाना चाह रहा है।
सीएमओ दफ्तर में सोमवार को प्रमाणपत्र बनवाने के लिए पहुंचे दिव्यांगों का परीक्षण चल रहा था। दोपहर के समय एक गांव निवासी युवक डॉक्टरों के पास पहुंचा। उसने अपना प्रमाणपत्र बनवाने की मांग की। डॉक्टरों ने उसके शरीर की जांच कर उसको मेडिकल कॉलेज में न्यूरोलॉजिस्ट के पास जांच पड़ताल के लिए रेफर किया। उसने जांच कराने से इंकार कर दिया। जबरन प्रमाणपत्र बनाने का दबाव डालने लगा। इसके बाद उसने सीएमओ ऑफिस में बने तीन दफ्तरों में डंडे से तोड़फोड़ शुरू कर दी। इससे दफ्तर में हड़कंप मच गया। प्रमाणपत्र बनवाने के लिए आए लोगों में भगदड़ मच गई। विभागीय कर्मचारियों ने उसे किसी तरह शांत कराया। इस दौरान दो बच्चे और कर्मचारी चोटिल हो गए। इसकी सूचना पुलिस को दी । इसके बाद उसे पुलिस ने एक कक्ष में बैठा दिया। सीएमओ डॉ. सुषमा चंद्रा ने कहा कि वह न्यूरो का मरीज है। इसकी जांच के लिए मेडिकल कॉलेज के लिए डॉक्टर ने लिखा, लेकिन उसने चिकित्सक के पास जाने से इंकार कर दिया। जबरन डॉक्टरों पर प्रमाणपत्र बनाने का दबाव डाल रहा था। मना करने पर उसने तोड़फोड़ कर दी। आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।
न्योरोलॉजिस्ट नहीं इस लिए किया था रेफर
दिव्यांग प्रमाणपत्र बना रहे बाबू अनिल कुमार ने बताया स्वास्थ्य विभाग में न्यूरोलॉजिस्ट नहीं है, इसलिए उसे मेडिकल कॉलेज के रेफर किया । जांच में 40 प्रतिशत से ऊपर न्यूरो का मरीज मिलता तो उसका प्रमाणपत्र बन सकता है।
30 के बने प्रमाणपत्र, 40 को भेजा जांच के लिए
सीएमओ दफ्तर में दिव्यांग प्रमाणपत्र बनवाने के लिए करीब 70 दिव्यांग पहुंचे। इनमें से 30 के सर्टिफिकेट बनवा दिए गए । बाकी 40 को जांच के लिए भेजा। जिले में प्रत्येक सोमवार को सीएमओ दफ्तर में दिव्यांगों के प्रमाणपत्र बनाएं जाते हैं।