बागपत। राजस्थान से शुरू हुए चोटी कटने के मामले अब वेस्ट यूपी में जोर पकड़ रहे हैं। घटनाएं खुद बताती हैं कि भ्रम, अफवाह और शरारत के सिवा कुछ नहीं है, लेकिन अंधविश्वास की जड़ें इतनी गहरी हैं कि पीड़ित डॉक्टर, मनोवैज्ञानिक या पुलिस के पास पहुंचने के बजाए सीधे तांत्रिकों के दरवाजों पर दस्तक देने में जुटे हैं। हासिल यह हुआ कि झाड़ फूंक करने वालों की दुकान चल निकली, लेकिन पीड़ित जहां से चले थे, वहीं पर खड़े हैं। देहात के अधिकतर घरों में कुत्ते, बिल्ली और बंदरों की आवाजाही कोई नई बात नहीं है, लेकिन अफवाह फैला दी बिल्ली दिखते ही चोटी कट रही है। एक भी वारदात ऐसी नहीं है, इसमें किसी ने चोटी कटते हुए देखी हो, सिर्फ चोटी कटी मिली है।
महिलाओं की संसद में मुद्दा सिर्फ चोटी
अंधविश्वास का आलम यह है कि घर से लेकर गली-मोहल्लों तक महिलाओं के बीच सिर्फ चोटी की ही चर्चा है। खौफ हर जगह है और इसके अपने-अपने इंतजाम भी किए जा रहे हैं। चोटी के सामने बाकी सारे मुद्दे गौण हो गए हैं।
घर में नीम, फिर भी दरवाजे पर टहनियां
अजीबो-गरीब मामले भी हैं। कई घर ऐसे हैं, जिनके आंगन में नीम का पेड़ खड़ा है, लेकिन चोटी बचाने के लिए दरवाजों पर नीम की टहनियां लटका दी गई है। नींबू और मिर्च लटकाने का दौर भी जिले में खूब चल रहा है।
तहरीर आने का इंतजार कर रही पुलिस
जिलेभर में चोटी कटने के कारण दहशत का माहौल है, लेकिन पुलिस जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए सिर्फ तहरीर आने का इंतजार कर रही है। अफवाह फैलाने वालों पर पुलिस की ओर से न कोई जांच कराई जा रही है और न ही अब तक कोई कार्रवाई की गई है।
जेवी डिग्री कॉलेज बड़ौत के पूर्व प्राचार्य डॉ. नरेंद्र सिंह कहते हैं कि सिर्फ अंधविश्वास है। लोग जागरूक बनें और भ्रम न फैलाएं। अपने आसपास अगर कोई ऐसा करता है तो उसे भी रोके।
अखिल उत्तर प्रदेश जाट महासभा की प्रदेश अध्यक्ष डॉ. शालिनी राकेश कहती हैं कि महिलाएं किसी तरह के भ्रम में न उलझें। युवाओं का दायित्व है कि वह जागरूकता फैलाएं।
पंडित राजकुमार शास्त्री कहते हैं कि औचित्यहीन मामले हैं। सबसे बड़े गुनहगार वह हैं, जो इस तरह के अंधविश्वास को समाज में फैलाते हैं। लोग जागरूक और जिम्मेदार बनें।
बड़ौत के मौलाना आरिफ कहते हैं कि यह सिर्फ भ्रम है, ऐसा कुछ नहीं है। महिलाओं को इस तरह के मामलों में घबराना नहीं चाहिए। चोटी कटने का कोई आधार नहीं है।
एसडीएम बागपत विवेक कुमार यादव कहते हैं कि यह सिर्फ शरारत है, हकीकत में ऐसा कुछ भी नहीं हो सकता। समाज को जागरूक होना पड़ेगा, युवा वर्ग लोगों का भ्रम दूर करें।
सीओ खेकड़ा संजीव सुमन का कहना है कि भ्रम फैलाया जा रहा है। हकीकत में ऐसा कभी नहीं हो सकता। किसी भी पीड़ित ने अभी तक थाने में तहरीर नहीं दी है।