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कातिल दोस्ती की दास्तान : जुबां पर मिठास और पीठ में घोंप रहे खंजर

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बागपत। कातिल दोस्ती की दास्तान ऐसी है कि जुबां पर मीठी मुस्कान और सीने में बदले की आग धधक रही है, जो मौका मिलते ही पीठ में खूनी खंजर घोंपकर दोस्तों की हत्या कर रहे हैं। पिछले कुछ समय में जिले में ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें सबसे करीबी दोस्त ही कातिल निकल चुके हैं। कई घटनाएं ऐसी हो चुकी हैं, जिनमें मृतकों के शव भी परिवार वालों को नहीं मिले, जिनका लावारिस में अंतिम संस्कार किया गया।
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केस नंबर एक-

मवीकलां के विशाल की बिजवाड़ा के जंगल में हुई थी हत्या
मवीकलां गांव के रहने वाले विशाल की हत्या उसके दोस्त अमित ने अपने भाई नीटू के साथ बिजवाड़ा गांव के जंगल में ईंट से सिर कूचकर की थी। हत्या के बाद नीटू एक मामले में जमानत तुड़वाकर जेल चला गया, जबकि अमित गांव छोड़कर बाहर रहने लगा। पुलिस को मिले शव की पहचान नहीं होने पर लावारिस में अंतिम संस्कार किया गया। दो महीने बाद पुलिस ने हत्याकांड का खुलासा किया। बताया गया कि पहले हुए झगड़े का बदला लेने के लिए विशाल की हत्या की गई।

केस नंबर दो-

नीटू की हत्या में भी दोस्त निकले आरोपी
कुर्डी गांव से तीन जुलाई से लापता फैक्टरी कर्मी नीटू की हत्या में उसके दोस्त ही हत्यारे निकले थे। जिन्होंने शराब पार्टी में हत्या करने के बाद गन्नौर के पास मुनक नहर में शव फेंक दिया। बाद में पुलिस को शव मिल गया, लेकिन पहचान नहीं होने पर उसका भी लावारिस में अंतिम संस्कार किया गया। पुलिस ने डेढ़ माह बाद हत्याकांड का खुलासा किया था।
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केस नंबर तीन-

कुर्डी के विक्रांत का शामली में मिला था शव
कुर्डी गांव निवासी विक्रांत उर्फ जॉनी 26 जून को लापता हो गया था, जिसके परिजनों ने थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई। साथ ही दोस्तों पर घर से बुलाकर लेकर जाने और हत्या का शक जताया था। पुलिस ने जांच पड़ताल की तो पता चला कि विक्रांत का शव शामली जिले के सैपत गांव के जंगल में मिला था, जिसकी पहचान नहीं होने पर लावारिस में अंतिम संस्कार किया गया। बाद में पुलिस ने हत्या की प्राथमिकी दर्ज कर विक्रांत के दोस्तों को गिरफ्तार कर जेल भेजा।

यहां पिछले कुछ दिनों में अधिकतर ऐसे ही मामले सामने आए हैं, जिनमें दोस्त ही हत्यारोपी निकले हैं। इस तरह के मामले पुलिस के लिए भी चुनौती है। रंजिश व जमीनी विवाद के मामलों में पुलिस पहले ही कार्रवाई कर सकती है, मगर ऐसे मामले में पहले कार्रवाई नहीं हो सकती है। ऐसे मामलों में परिवार वालों को ध्यान देना होगा कि उनके बेटे का किस तरह की जगह उठना-बैठना है और कुछ भी गलत लगने पर उनको खुद ही रोक सकते हैं।
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-सूरज कुमार राय, एसपी
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